सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: अदालत की अनुमति के बिना पुलिस नहीं कर सकती आगे की जांच

Important decision of the Supreme Court. सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों की जांच प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस किसी भी मामले में अपनी मर्जी से आगे की जांच शुरू नहीं कर सकती। इसके लिए संबंधित अदालत से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

अदालत का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 173(8) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193(9) के तहत कहा कि यदि पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के बाद आगे की जांच करनी हो, तो उसे पहले संबंधित अदालत से अनुमति लेनी होगी।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों को पहले अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि मामले में आगे की जांच क्यों आवश्यक है और कौन से नए तथ्य या साक्ष्य सामने आए हैं। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि आगे की जांच की अनुमति दी जाए या नहीं।

जांच की प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि बिना न्यायिक अनुमति के आगे की जांच शुरू करने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और अभियुक्तों के अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए जांच की प्रक्रिया पर न्यायालय की निगरानी आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की अनुचित कार्यवाही से बचा जा सके।

यह फैसला पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है और न्यायिक प्रक्रिया को सही दिशा में बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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