
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हल्फनामा दाखिल किया। यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में आशीष मिश्रा की ज़मानत का कड़ा विरोध किया था। यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा कि राज्य सरकार आशीष मिश्रा की ज़मानत को चुनाव देने पर विचार कर रही है। यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा कि मामले में एक गवाह पर हमले और धमकी का आरोप गलत है। यह होली का रंग डालने से जुड़े विवाद में 2 पक्षों के बीच मारपीट का मामला है। लखीमपुर खीरी कांड के आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की मांग पर SC में कल सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में यूपी सरकार ने इस आरोप का खंडन किया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में आशीष मिश्रा की ज़मानत याचिका का विरोध नहीं किया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने याचिकाकर्ता के इस आरोप को भी खरिज किया कि आशीष मिश्रा के ज़मानत पर बाहर आने के बाद गवाह पर हमला हुआ। एक गवाह पर हमले और धमकी का आरोप गलत है। यह होली का रंग डालने से जुड़े विवाद में 2 पक्षों के बीच मारपीट का मामला है। यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि राज्य सरकार ने मामले में अब तक 98 गवाहों को सुरक्षा दी है। पुलिस सभी गवाहों से नियमित रूप से संपर्क करती है ताकि उ की सुरक्षा की स्तिथि का आंकलन किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च को आशीष मिश्रा की ज़मानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से सभी गवाहों की सुरक्षा सुनिशित करने को कहा था। 10 फरवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत दे दी थी जिसको पीड़ित किसान परिवार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा कि ज़मानत देते समय अपराध की गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया। राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील करनी चहिए थी पर राज्य सरकार ने आशीष मिश्रा की ज़मानत को चुनौती नहीं दी।









