
उत्तर प्रदेश, जो आकार और प्रशासनिक जटिलता के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है, में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के कैडर में बढ़ोतरी का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। राज्य सरकार द्वारा IAS अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 652 से बढ़ाकर 683 करने के केंद्र के फैसले को न केवल प्रशासनिक सुधारों के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह योगी सरकार के लिए एक राजनीतिक राहत भी साबित हो सकता है।
IAS कैडर में बढ़ोतरी से यूपी के प्रशासन को मिलेगा लाभ
यह निर्णय केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत किया और इसे जल्द ही लागू कर दिया गया। इस फैसले से न केवल नौ नए पदों का सृजन हुआ है, बल्कि 18 लंबे समय से खाली पड़े पदों के साथ कुल 27 नए पदों पर प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारियों के IAS में प्रमोशन का रास्ता भी साफ हो गया है। इससे यूपी के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिलेगी और कामकाजी क्षेत्र में संतुलन आएगा।
IAS कैडर का असर प्रशासन और चुनावों पर
उत्तर प्रदेश में 75 जिले और 18 मंडल होने के कारण प्रशासनिक दबाव हमेशा बना रहता है। यह राज्य ऐसे कई विभागों, योजनाओं और अभियानों का संचालन करता है कि कई बार एक ही अधिकारी को एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इससे कई बार शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती रही है। IAS अधिकारियों की संख्या में बढ़ोतरी से अधिकारियों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था, और चुनावी तैयारी में सुधार होगा।
PCS से IAS प्रमोशन और प्रशासनिक सुधार
इस फैसले में खास बात यह है कि प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारियों को IAS में प्रमोशन मिल रहा है, जो शासन के कामकाजी ढांचे को बेहतर समझते हैं। कई PCS अधिकारी लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे, और अब इनकी नियुक्ति से प्रशासनिक अनुभव और निरंतरता में वृद्धि होगी। यह चुनावी वर्ष में सरकार के लिए एक बड़ा फायदा साबित हो सकता है, क्योंकि PCS से प्रमोट होकर IAS अधिकारी ज़मीन से जुड़े होते हैं और योजनाओं को बिना किसी रुकावट के तेजी से लागू कर सकते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक लाभ
यह फैसला योगी सरकार के लिए प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ एक राजनीतिक कदम भी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि IAS कैडर में बढ़ोतरी से सरकार को जिलों और विभागों में स्थिरता मिलेगी, जिससे चुनावी साल में योजनाओं का असर बेहतर तरीके से दिख सकेगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार के साथ यूपी सरकार का बेहतर तालमेल भी इस फैसले के पीछे देखा जा सकता है, जो राजनीतिक रूप से सकारात्मक संदेश दे रहा है।
व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
IAS कैडर में बढ़ोतरी से न केवल प्रशासन में सुधार होगा, बल्कि राज्य के विकास कार्यों की गति भी तेज होगी। इस बढ़ोतरी से अधिकारियों के कार्यभार में संतुलन आएगा और ज्यादा स्थिरता मिलेगी, जिससे योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी। इसके अलावा, जिलों में निर्णयों की गति भी बढ़ेगी और चुनावी साल में शासन की धार को मजबूत किया जा सकेगा।









