दक्षिण चीन सागर में चीन की किसी भी असामान्य गतिविधि का जवाब देने के लिए भारतीय नौसेना तैयार – नौसेना प्रमुख

नौसेना प्रमुख ने अपने एक संबोधन में कहा कि दक्षिण चीन सागर में चीन की भारत के विरुद्ध की जा रही समुद्री गतिविधियों पर लगातार पर नजर रख रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदम भी उठा रहा है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) हिंद महासागर में अपना रास्ता न बना ले। इस क्षेत्र में भारतीय युद्धपोत चौबीसों घंटे युद्ध के लिए तत्परता के साथ काम कर रहे हैं। किसी भी असामान्य गतिविधि की पूरी तत्परता और तैयारी के साथ माकूल जवाब दिया जायेगा।

नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने बुधवार को इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2021 में अपने संबोधन में कहा कि कुछ देश दक्षिण चीन सागर में भूमि-केंद्रित क्षेत्रीय मानसिकता अपनाये हुए हैं। ये दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक रवैये के अप्रत्यक्ष सन्दर्भ में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अधिक से अधिक प्रभुत्व और नियंत्रण हासिल करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। बता दें कि दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दखल, इस क्षेत्र के कई देशों जैसे वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान की राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा है।

नौसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि विवादित समुद्री क्षेत्रों के सम्बन्ध में सर्वमान्य पूर्व के समझौतों की पुनर्व्यख्या हिन्द प्रशांत क्षेत्र को और अधिक विवादित बना रहा है। भारत दक्षिण चीन सागर में चीन की भारत के विरुद्ध की जा रही समुद्री गतिविधियों पर लगातार पर नजर रख रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदम भी उठा रहा है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) हिंद महासागर में अपना रास्ता न बना ले। इस क्षेत्र में भारतीय युद्धपोत चौबीसों घंटे युद्ध के लिए तत्परता के साथ काम कर रहे हैं। किसी भी असामान्य गतिविधि की पूरी तत्परता और तैयारी के साथ माकूल जवाब दिया जायेगा।

नौसेना प्रमुख ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक भू-राजनीति और अर्थशास्त्र का गुरुत्व-केंद्र कहा है। दरअसल, इस क्षेत्र के कूटनीति, वाणिज्य, विचारधारा, मूल्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के आयामों को लेकर तमाम देशों के बीच एक प्रतिस्पर्धा व्याप्त हो चुकी है जो इस क्षेत्र में समुद्री विवाद की संभावना को और अधिक बढ़ा देता है।

इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2021 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे उन्होंने भाषण में कहा, “भारत UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) में निर्धारित सभी देशों के अधिकारों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम अपने क्षेत्रीय जल और विशेष आर्थिक क्षेत्र के संबंध में अपने देश के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

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