
नई दिल्ली: भारत के रक्षा क्षेत्र ने एक और मील का पत्थर छू लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को घोषणा की कि देश का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 12.04 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। सरकार ने 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का रक्षा निर्यात 21,083 करोड़ रुपये था, जबकि 2024-25 में यह 23,622 करोड़ रुपये हो गया, जो 2,539 करोड़ रुपये की वृद्धि को दर्शाता है। यह भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और स्वदेशी निर्माण पर जोर देने की नीति का नतीजा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए सभी हितधारकों को बधाई देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने कहा कि भारत अब आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होते हुए एक वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
डीपीएसयू और निजी क्षेत्र का योगदान
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2024-25 में निजी क्षेत्र और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू) ने क्रमशः 15,233 करोड़ रुपये और 8,389 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात में योगदान दिया। पिछले वर्ष ये आंकड़े 15,209 करोड़ रुपये और 5,874 करोड़ रुपये थे। डीपीएसयू के निर्यात में 42.85 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैश्विक बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि रक्षा उत्पादन विभाग ने 2024-25 में 1,762 निर्यात प्राधिकरण जारी किए, जबकि 2023-24 में यह संख्या 1,507 थी। इस दौरान निर्यातकों की कुल संख्या में भी 17.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत अब एक बड़े आयातक से आत्मनिर्भर सैन्य उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत गोला-बारूद, हथियार, उप-प्रणाली, प्रणाली और पुर्जों का निर्यात किया जा रहा है। हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में लगभग 80 देशों को भारतीय रक्षा उपकरण निर्यात किए गए।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत अब विदेशी बाजारों में अपने उत्पादों के लिए मजबूत मांग देख रहा है। डीपीएसयू और निजी क्षेत्र की कंपनियों के निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
भविष्य की रणनीति और लक्ष्य
भारत सरकार ने 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में नई तकनीकों का विकास, उत्पादन क्षमताओं में वृद्धि और वैश्विक बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की स्वीकार्यता को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने से भारत की सैन्य क्षमताओं में भी इजाफा होगा और देश रक्षा आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा। भारत अब वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की ओर अग्रसर है।
भारत का रक्षा निर्यात लगातार नए आयाम छू रहा है। 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के साथ, देश आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सरकार और रक्षा उद्योग के संयुक्त प्रयासों से भारत निकट भविष्य में 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।