
भारत के लिए 2047 तक एक वैश्विक तकनीकी नेता बनने का सपना सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि एक संभावनात्मक लक्ष्य है। एक युवा जनसंख्या, गतिशील स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और बढ़ते डिजिटल परिवर्तन के साथ, भारत की तकनीकी प्रगति के लिए तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों – एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग (QC) और सेमीकंडक्टर – पर ध्यान केंद्रित करना अनिवार्य हो सकता है। अगर इन तीन क्षेत्रों में सही रणनीति अपनाई जाए, तो भारत न केवल घरेलू विकास को गति दे सकता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी साख मजबूत कर सकता है।
एआई का 2030 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
2030 तक एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था में $15.7 ट्रिलियन का योगदान करने का अनुमान है, जो ब्रिटेन की 2024 की जीडीपी से चार गुना अधिक है। एआई को सही दिशा में लागू करके भारत की वृद्धि को तेज किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सभी क्षेत्रों में इस तकनीकी परिवर्तन को अपनाना होगा।
क्वांटम कंप्यूटिंग: समस्याओं को हल करने की नई दिशा
क्वांटम कंप्यूटिंग (QC) एक क्रांतिकारी तकनीक है जो समस्याओं को हल करने की क्षमता में एक बड़ा परिवर्तन लाएगी। यह तकनीक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अनुकूलित करने से लेकर दवाओं की खोज तक के विभिन्न प्रक्रियाओं में उपयोग हो रही है। इस तकनीक के व्यापक उपयोग से भारत की तकनीकी क्षमताओं को एक नई ऊंचाई मिल सकती है।
सेमीकंडक्टर उद्योग: घरेलू उत्पादन की दिशा में कदम
भारत की सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर और स्थानीय चिप डिजाइन और उत्पादन में निवेश करके, भारत अपनी निर्भरता को आयात पर कम कर सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। सेमीकंडक्टर उद्योग भारत की डिजिटल परिवर्तन प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए इन क्षेत्रों में नवाचार जरूरी
“विकसित भारत” की दिशा में भारत को इन तीन तकनीकी क्षेत्रों – एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर – में नवाचार को बढ़ावा देना होगा और उत्पाद-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना होगा। यदि भारत ने इन क्षेत्रों में सटीक रणनीतियों के साथ काम किया, तो यह वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
आईपीआर और पेटेंट प्रणाली में सुधार की आवश्यकता
भारत में पिछले दशक में आईपीआर भुगतान तीन गुना बढ़ गए हैं, लेकिन आईपीआर प्राप्ति में भी दो गुना बढ़ोतरी देखी गई है। इसका मतलब यह है कि भारत जितना भुगतान कर रहा है, उतना ही कम उसे इसका लाभ मिल रहा है। इसलिए यह जरूरी है कि भारत के पेटेंट और नवाचार को व्यावसायिक उत्पादों और सेवाओं में बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
अनुसंधान और विकास के लिए सरकार की योजनाएं
भारत ने अनुसंधान और विकास (R&D) में सुधार लाने के लिए ₹1 लाख करोड़ का फंड और ₹10,300 करोड़ की राशि इंडिया एआई मिशन के लिए आरक्षित की है। इसके अलावा, गहरे तकनीकी क्षेत्र के लिए फंड ऑफ फंड्स की स्थापना की गई है। यह कदम भारत को तकनीकी नवाचार की दिशा में एक प्रमुख खिलाड़ी बना सकते हैं।
उच्च-स्तरीय वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों की वापसी जरूरी
भारत में उच्च-स्तरीय शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को आकर्षित करने और उन्हें भारत में वापस लाने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम की आवश्यकता है। ऐसे कार्यक्रम, जो शीर्ष 100 वैश्विक विश्वविद्यालयों के 250 प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को भारत में लाने के लिए सक्षम हो, भारत को एक मजबूत वैश्विक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में बदल सकते हैं।
अन्य देशों से भारत की तुलना
चीन जैसे देशों ने अपनी युवाओं को शोध के लिए आकर्षित करने में सफलता हासिल की है, जैसे “यंग थाउज़ेंड टैलेंट्स” (YTT) कार्यक्रम के माध्यम से, चीन ने 20,000 वैज्ञानिकों को वापस लाने में सफलता प्राप्त की। भारत को इस दिशा में सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि वह तकनीकी क्षेत्र में नेतृत्व कर सके और युवा वैज्ञानिकों के लिए देश में अवसर प्रदान कर सके।