
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “लॉक्ड एंड लोडेड” टिप्पणी पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल किया, तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। इस बयान पर ईरान ने तीखी चेतावनी दी, जिसमें कहा गया कि अगर अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया, तो पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे और फोर्स टारगेट बन सकते हैं।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने ट्रंप की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि ईरान किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनी के वरिष्ठ सलाहकार भी अमेरिकी हस्तक्षेप पर चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया, तो इसका परिणाम पूरे क्षेत्र में अराजकता का कारण बन सकता है।
ईरान में प्रदर्शन: आर्थिक मुद्दों से सरकार-विरोधी आंदोलन तक
ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य बड़े शहरों में रविवार से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जो शुरुआत में आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित थे। मुद्रा रियाल की गिरावट, मुद्रास्फीति और महंगाई के खिलाफ दुकानदारों ने हड़ताल की, और यह हड़ताल जल्द ही पूरे देश में फैल गई। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में अब तक सात लोग मारे जा चुके हैं।
विरोध अब सिर्फ आर्थिक समस्याओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि कई स्थानों पर सरकार विरोधी नारे भी लगाए जा रहे हैं। कुम, इस्फहान, मशहद, और हमदान जैसे शहरों में प्रदर्शन फैल चुके हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सरकार की ओर से लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेने का वादा किया है, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार के पास स्थिति को सुधारने के लिए सीमित विकल्प हैं।
ट्रंप का बयान और मानवाधिकार मुद्दा
ईरान में हो रहे इस बड़े विरोध प्रदर्शन को लेकर अमेरिका का रुख साफ है। ट्रंप का बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका ईरान में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर नजर रखे हुए है, विशेष रूप से तब जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमन की कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर, ईरान इसे अपने आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप मानता है।
ईरान सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पूरी तरह से वैध हैं, लेकिन अशांति फैलाने वालों को कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे और अपनी संप्रभुता की रक्षा करेंगे।
क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की दिशा
दोनों देशों के बीच यह तनाव केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान-इजरायल संबंधों में हाल ही में बढ़ी हुई तनाव की स्थिति और अब अमेरिका के साथ यह टकराव मध्य पूर्व में उथल-पुथल पैदा कर सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह पारस्परिक धमकियां न केवल दोनों देशों, बल्कि समूचे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय हैं।
यह स्थिति यह भी दर्शाती है कि ईरान में बढ़ती आर्थिक समस्याएं और प्रदर्शनकारियों की लगातार बढ़ती संख्या, ईरान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। भविष्य में इन घटनाओं का परिणाम कैसे होगा, यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि यह केवल ईरान की आंतरिक राजनीति नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।









