
Iran crisis: Trump has three options, risk of war increases. अमेरिकी सेना की तैनाती के बाद से ईरान के आसपास युद्ध का खतरा बढ़ गया है। इराक युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी मिलिट्री इतनी बड़ी तादाद में मध्य-पूर्व में तैनात हुई है। अमेरिकी जंगी जहाजों और लड़ाकू विमानों के ईरान के नजदीक पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हमले पर आखिरी फैसला लेना है। ट्रंप ने हमले की धमकी दी है, और ईरान-अमेरिका के न्यूक्लियर समझौते पर बातचीत भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान से निपटने के तीन प्रमुख विकल्प हैं।
डिप्लोमेसी (Diplomacy)
डोनाल्ड ट्रंप मिलिट्री एक्शन से बचने की कोशिश कर सकते हैं और ईरान के साथ एक समझौता करने की उम्मीद करेंगे। उनका मानना है कि अमेरिकी सेना की तैनाती से तेहरान शासन दबाव में आएगा और वह अमेरिका की शर्तों पर डील करने को तैयार हो जाएगा। वाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि उनका प्राथमिक उद्देश्य मिलिट्री संघर्ष से बचना है। ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर ईरानी अधिकारियों से अप्रत्यक्ष बातचीत कर रहे हैं, और वे चाहते हैं कि इस प्रक्रिया को थोड़ा और समय दिया जाए। यदि बातचीत सफल होती है तो यह क्षेत्रीय तनाव को कम कर सकता है।
लिमिटेड स्ट्राइक (Limited Strike)
डोनाल्ड ट्रंप अपनी शर्तों को मनवाने के लिए एक लिमिटेड मिलिट्री स्ट्राइक का आदेश दे सकते हैं। इसके तहत अमेरिकी सेना ईरान के न्यूक्लियर हथियार बनाने के ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर हमला कर सकती है। ट्रंप ने खुद कहा है कि वह इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं और इस तरह की स्ट्राइक से यह संदेश जाएगा कि उनकी सैन्य धमकियां वास्तविक हैं। यह कदम ईरान को अमेरिका के खिलाफ किसी भी हमले से बचने के लिए दबाव में ला सकता है।
सत्ता परिवर्तन (Regime Change)
डोनाल्ड ट्रंप का तीसरा विकल्प ईरान में सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा करता है, जिसमें ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए बड़ा सैन्य आक्रमण किया जा सकता है। यह विकल्प डिप्लोमेसी के विफल होने पर उठाया जा सकता है, जिसमें अमेरिकी सेना ईरान के सत्ता में बैठे प्रमुख व्यक्तियों को निशाना बनाएगी। इसमें ईरानी नेताओं, मिलिट्री अधिकारियों और सरकारी इंस्टॉलेशन पर हमले शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस विकल्प में भविष्य के शासन की स्पष्टता नहीं है, क्योंकि यह सवाल बना हुआ है कि सत्ता परिवर्तन के बाद कौन उस स्थान को संभालेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति के पास ईरान के साथ संबंधों को सुलझाने के लिए तीन प्रमुख विकल्प हैं, जिनमें से हर एक का परिणाम गंभीर हो सकता है। जहां एक तरफ डिप्लोमेसी से तनाव कम करने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की धमकी क्षेत्र में युद्ध के खतरे को और बढ़ा सकती है। ट्रंप के लिए यह निर्णय तय करना चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि इन विकल्पों के परिणाम वैश्विक राजनीति पर दूरगामी असर डाल सकते हैं।









