ईरान का बड़ा पलटवार! ‘Operation True Promise 4’ के तहत US-Israel ठिकानों पर 83वीं स्ट्राइक, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

IRGC के मुताबिक, इस ऑपरेशन में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलें, मल्टी-वॉरहेड तकनीक और सुसाइड ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर बड़ा सैन्य कदम उठाया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शुक्रवार को ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत 83वीं जवाबी कार्रवाई शुरू की। इस ऑपरेशन में अमेरिका और इजरायल से जुड़े कई सैन्य ठिकानों को एडवांस मिसाइल और ड्रोन से घुमाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अशदोद के ऑयल डिपो और स्टोरेज टैंकों के साथ-साथ मोदीन क्षेत्र में सैन्य ठिकानों को घुमाया। इसके अलावा, अमेरिकी सैन्य सूचना केंद्र को भी भेजा गया।

ईरानी हमलों में अल-धफरा और अली अल-सलेम एयरबेस जैसे अहम अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया गया। यहां ट्रांसपोर्टेशन प्लेन और ड्रोन के रखरखाव से जुड़े हैंगर को घुमाया गया।

एडवांस हथियारों का इस्तेमाल
IRGC के मुताबिक, इस ऑपरेशन में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलें, मल्टी-वॉरहेड तकनीक और सुसाइड ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यह हमला तकनीकी रूप से काफी उन्नत बताया जा रहा है।

तनाव कम करने की कोशिश नाकाम
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अस्थायी राहत देने के संकेत दिए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने 7 दिन का विराम मांगा था, जिसे बढ़ाकर 10 दिन कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद हमले जारी हैं।

ईरान के ठिकानों पर भी जवाबी कार्रवाई
विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका-इजरायल की संयुक्त सेना भी ईरान के मिसाइल सिस्टम, लॉन्च साइट्स और रक्षा उत्पादन केंद्रों को घुमा रही है। शिराज के एयरबेस पर भी हमले की खबर है।

न्यूक्लियर प्लांट को लेकर बढ़ी चिंता
IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने ईरान के बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हो रहे हमलों पर गहरी चिंता पहुंचाई है। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है।

कुल मिलाकर, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने मध्य पूर्व को फिर से बड़े युद्ध की ओर धकेल दिया है। स्थायित्व अथक बने हुए हैं और आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।

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