
भारत में घूमना, ताजमहल के सामने सेल्फी लेना और समुद्र किनारे खरीदारी करना, ईरान के उन नाविकों के लिए यह शायद आख़िरी यादें बन गईं, जिनका जहाज़ कुछ ही दिनों बाद समुद्र में हमले का शिकार हो गया।
दरअसल, ईरान की नौसेना का युद्धपोत IRIS Dena फरवरी में विशाखापट्टनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में शामिल होने भारत आया था। इस दौरान जहाज़ के कई ईरानी नाविकों ने विशाखापट्टनम में घूमने-फिरने के साथ-साथ ताजमहल और बोधगया जैसे ऐतिहासिक स्थलों का भी दौरा किया। वहां उन्होंने तस्वीरें खिंचवाईं और स्थानीय बाजारों में खरीदारी भी की।
दरअसल ईरान की नौसेना का युद्धपोत IRIS Dena फरवरी में विशाखापट्टनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में भाग लेने के लिए भारत आया था। इस दौरान जहाज के कई ईरानी नाविकों ने भारत के अलग-अलग शहरों का दौरा किया। वे विशाखापट्टनम में घूमे, समुद्र किनारे खरीदारी की और आगरा जाकर ताजमहल के सामने तस्वीरें और सेल्फी भी लीं। इसके अलावा कुछ नाविकों ने बोधगया जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण किया।
लेकिन भारत में बिताए गए ये पल शायद उनके जीवन की आखिरी यादें बन गए। कुछ ही दिनों बाद खुले समुद्र में ईरान के इसी युद्धपोत पर सैन्य हमला हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसेना ने पनडुब्बी के जरिए इस जहाज को निशाना बनाया। हमले के बाद यह युद्धपोत गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया और बाद में समुद्र में डूब गया।
बताया जा रहा है कि जहाज पर उस समय 100 से ज्यादा लोग सवार थे। इस हमले में लगभग 80 ईरानी नौसैनिकों की मौत होने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ गया है। खासकर हिंद महासागर क्षेत्र से जुड़े देशों के लिए इसे रणनीतिक रूप से गंभीर घटना माना जा रहा है।
जिस युद्धपोत को निशाना बनाया गया उसका नाम IRIS Dena था। यह ईरान की मौज क्लास फ्रिगेट श्रेणी का आधुनिक युद्धपोत था और इसे ईरानी नौसेना के सबसे उन्नत जहाजों में गिना जाता था। इस जहाज का पेनेंट नंबर 75 था और यह ईरानी नौसेना के दक्षिणी बेड़े का हिस्सा था। इसका नाम ईरान के प्रसिद्ध पहाड़ माउंट डेना के नाम पर रखा गया था।
IRIS Dena का निर्माण ईरान के बंदर अब्बास स्थित नौसैनिक शिपयार्ड में किया गया था। इस युद्धपोत का निर्माण कार्य 2012 में शुरू हुआ था और 2015 में इसे समुद्र में उतारा गया। इसके बाद 13 जून 2021 को इसे आधिकारिक तौर पर ईरानी नौसेना में शामिल किया गया। खास बात यह थी कि यह जहाज पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया गया था और इसके कई महत्वपूर्ण सिस्टम ईरान में ही विकसित किए गए थे।
इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें मध्य पूर्व की स्थिति पर टिक गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की घटनाएं जारी रहती हैं तो वैश्विक समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा असर पड़ सकता है।








