इजरायल ने पाकिस्तान की भूमिका पर जताया एतराज, ट्रंप ने करवाई एंट्री, अब बोर्ड ऑफ पीस पर भी होगा बवाल!

अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड की शुरुआत की है.

दावोस में इस वक्त बोर्ड ऑफ पीस जो चल रहा है उसको लेकर तरह-तरह की बातें उठ रही है. पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का इसमें शामिल होना और फिर इजरायल के साथ गाजा के मैटर में ट्रंप की ओर से एंट्री मिलना…इन सब चीजों ने इस मुद्दों को गरमा दिया है….

दरअसल, इजरायल ने पहले ही साफ कर दिया था कि गाजा से जुड़े किसी भी फोर्स में पाकिस्तान की मौजूदगी को लेकर वह तैयार नहीं है. फिर भी पाकिस्तान को ट्रंप से बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला था. भारी विरोध के बाद भी उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया. पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावोस में आयोजित कार्यक्रम में कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड की शुरुआत की है.

हाल ही में एक रिपोर्ट में इजरायल के भारत में राजदूत रेवेन अजर ने गाजा में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान गाजा फोर्स का हिस्सा बनता है तो इजरायल इसके लिए असहज महसूस करेगा. 9 जनवरी को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अजर ने कहा, “हमारे लिए हमास को खत्म करना सबसे जरूरी है, और इसके लिए हमें किसी भी रास्ते का चयन करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि कई देश पहले ही इस बात का संकेत दे चुके हैं कि वे हमास से नहीं लड़ना चाहते, जिससे मौजूदा स्थिति में कोई समाधान नहीं मिल पा रहा है.

जब अजर से यह पूछा गया कि क्या वह गाजा में पाकिस्तानी सेना की भूमिका पर सहज हैं, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से नकारते हुए कहा, हम इसके लिए सहज नहीं हैं. वहीं इस मामले पर इजरायल के मंत्री निर बरकात ने दावोस में कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले किसी भी देश को गाजा में सैनिकों की तैनाती करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि कतर और तुर्की जैसे देश, जो गाजा में जिहादी संगठनों का समर्थन करते हैं, को इजरायल पर भरोसा नहीं है.

वहीं, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी ने पाकिस्तान सरकार के शांति बोर्ड में शामिल होने के फैसले का विरोध किया है. पार्टी ने कहा कि इस तरह के फैसले पारदर्शिता और सभी प्रमुख राजनीतिक हितधारकों के साथ समावेशी चर्चा के बाद ही लिए जाने चाहिए.मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन (MWM) के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे “नैतिक रूप से गलत और अस्वीकार्य” करार दिया.

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