UN महासभा में जयशंकर का संबोधन: पाकिस्तान पर निशाना, UNSC सुधार और वैश्विक चुनौतियों पर जोर

पाकिस्तान को आतंकवाद का “एपिसेंटर” करार दिया। उन्होंने कहा कि UN की आतंकवादी सूची ऐसे नामों से भरी है जो इसी देश से जुड़े हैं।

पाकिस्तान को बताया आतंकवाद का गढ़
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान बिना नाम लिए पाकिस्तान को आतंकवाद का “एपिसेंटर” करार दिया। उन्होंने कहा कि UN की आतंकवादी सूची ऐसे नामों से भरी है जो इसी देश से जुड़े हैं। पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों की रक्षा का अधिकार इस्तेमाल किया और आतंकियों को न्याय के कटघरे में लाया।

UN पर उठाए सवाल, सुधार की मांग
जयशंकर ने कहा कि संघर्ष, संसाधनों की कमी और आतंकवाद के कारण संयुक्त राष्ट्र “गतिरोध” की स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने अफ्रीका के ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने और सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी और अस्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग की। भारत इसके लिए बड़ी जिम्मेदारी उठाने को तैयार है।

भारत की भूमिका और योगदान
विदेश मंत्री ने शांति स्थापना मिशनों में भारत की भूमिका, अरब सागर में समुद्री डकैती से निपटने के प्रयासों और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने को विदेश नीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भरता), आत्मरक्षा (आत्मरक्षा) और आत्मविश्वास (आत्मविश्वास) के सिद्धांतों पर वैश्विक मंचों पर कार्य कर रहा है।

वैश्विक चुनौतियों पर चिंता
जयशंकर ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन संघर्ष, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर धीमी प्रगति, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने शुल्क अस्थिरता और बाजार की अनिश्चितता को भी गंभीर समस्या बताया। “सीमित आपूर्ति या किसी एक बाजार पर अधिक निर्भरता से बचना आज की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा।

आतंकवाद पर सख्ती की मांग
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकना होगा और इसके इकोसिस्टम पर लगातार दबाव बनाए रखना जरूरी है। भारत आतंकवाद और उसके प्रायोजकों में कोई भेद नहीं करेगा।

संघर्षों में शांति की अपील
गाजा और यूक्रेन संकट पर उन्होंने कहा कि जिन देशों के पास संवाद की क्षमता है, उन्हें आगे आना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी ऐसी पहल का समर्थन करेगा जो शांति बहाल करने में मददगार होगी।

ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत
जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्रता बनाए रखेगा और हमेशा ग्लोबल साउथ की आवाज बना रहेगा।

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