सपा को समर्थन देते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज, क्या 2027 में साथ आएंगे अखिलेश-राजा भैया?

राज्यसभा चुनाव से पहले सपा ने राजा भैया से समर्थन की अपील की थी। लेकिन राज भैया ने भाजपा को सपोर्ट किया था....

उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में राजा भैया की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। वजह यह है कि उनकी पार्टी जनसत्ता दल ने समाजवादी पार्टी को समर्थन दे दिया है। इसके साथ ही अब सवाल उठने लगे हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान इतनी उठापठक के बीच भी तटस्थ रहने वाले राजा भैया आखिर सपा के साथ क्यों चले गए। दअरसल बुधवार को देर शाम जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के जिला अध्यक्ष संजू मिश्रा सपा के मिर्जापुर कार्यालय पहुंचे और अपना समर्थन पत्र सपा जिलाध्यक्ष को सौंप दिया।

इसके साथ ही यूपी के सियासत में जैसे आग लग गया हो। चर्चा का विषय बना हुआ हुआ है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि राजा भैया सपा के साथ चले गए।

इस लिए भाजपा से नाराज हैं राजा भैया

राज्यसभा चुनाव से पहले सपा ने राजा भैया से समर्थन की अपील की थी। लेकिन राज भैया ने भाजपा को सपोर्ट किया था। माना जा रहा था कि इसके बदले में बीजेपी ने राजा भैया को मदद करने का भरोसा दिया था। राजा भैया कौशाम्बी लोकसभा लोकसभा सीट मांग रहे थे। लेकिन भाजपा अपने वादे से मुकर गई और बीजेपी ने कौशाम्बी से विनोद सोनकर को मैदान में उतार दिया इसके साथ ही प्रतापगढ़ से भी संगम लाल गुप्ता को टिकट दे दिया। इससे राजा भैया आहत हुए।

माना जा रहा है कि राजा भैया विनोद सोनकर को अपना विरोधी मानते हैं। इसके साथ ही संगम लाल को लेकर भी राजा भैया ने नाराजगी जाहिर की थी। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। बीजेपी नामों का ऐलान कर चुकी थी। इसके बाद माना जा रहा था कि। चुनाव के बाद राजा भैया को एमएलसी या राज्यसभा की एक सीट दे सकती है। इसके बदले बीजेपी के समर्थन में प्रचार करने और मंच शेयर करना तय हुआ था। लेकिन इसके लिए राजा भैया को कोई आमंत्रण भी नहीं आया।

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