
करवा चौथ 2026: हिंदू धर्म में करवा चौथ के व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत का पारण करती हैं। करवा चौथ की पूजा में करवा, छलनी, दीपक, चावल और सुहाग की सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी चीजों के बीच करवा की टोंटी में लगाई जाने वाली सींकों का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इन सींकों के बिना करवा चौथ की पूजा अधूरी रहती है। आइए जानते हैं इन सींकों से जुड़ी पौराणिक कथा और पूजा में इनके इस्तेमाल की परंपरा के बारे में।
करवा चौथ की पूजा में किन सामग्रियों का होता है इस्तेमाल?
करवा चौथ की पूजा के लिए महिलाएं कई तरह की पूजन सामग्रियों का इस्तेमाल करती हैं। इनमें मिट्टी का करवा, छलनी, दीपक, चावल, सुहाग की सामग्री और सींकें प्रमुख हैं। पूजा के दौरान महिलाएं करवा की टोंटी में सींकें लगाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन सींकों को करवा चौथ की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में अंतर हो सकता है।
करवा चौथ में सींकों के इस्तेमाल के पीछे क्या है पौराणिक कथा?
करवा चौथ की पूजा में करवा की टोंटी पर सींकें लगाने के पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा बताई जाती है। इस कथा के अनुसार, एक बार करवा माता के पति का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। अपने पति की रक्षा के लिए करवा माता ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए सींकों से मगरमच्छ को बांध दिया।
इसके बाद करवा माता यमराज के पास पहुंचीं। उस समय चित्रगुप्त स्वर्गलोक में लोगों के कर्मों का लेखा-जोखा लिख रहे थे। कथा के अनुसार, करवा माता ने सींकों की सहायता से चित्रगुप्त के लेखे में पति से जुड़े प्रसंग को अलग कर दिया। इसके बाद यमराज को उनके पति के प्राणों की रक्षा करनी पड़ी।
इसी पौराणिक मान्यता के आधार पर करवा चौथ की पूजा में सींकों का इस्तेमाल किया जाता है। माना जाता है कि इन सींकों को पूजा में शामिल करने से करवा माता का आशीर्वाद मिलता है और पति की दीर्घायु की कामना पूरी होती है। यह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी कथा है।
करवा चौथ की पूजा में कितनी सींकों का किया जाता है इस्तेमाल?
करवा चौथ की पूजा में सींकों की संख्या को लेकर भी विशेष परंपरा प्रचलित है। इस मान्यता के अनुसार, पूजा में कुल 28 सींकों का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें सात-सात की संख्या में चार जगहों पर रखा जाता है, जबकि सात सींकें करवा की टोंटी पर लगाई जाती हैं।
करवा माता की पूजा और परिक्रमा के दौरान भी करवा की टोंटी में सींकें लगी रहने की परंपरा बताई जाती है। हालांकि, सींकों की संख्या और उन्हें रखने की विधि क्षेत्रीय तथा पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
करवा चौथ की पूजा में सींकों का क्या है धार्मिक महत्व?
करवा चौथ की पूजा में सींकों को पति की रक्षा, दीर्घायु और वैवाहिक सुख की कामना से जोड़कर देखा जाता है। सुहागिन महिलाएं इस परंपरा का पालन कर करवा माता से अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
इस तरह करवा चौथ की पूजा में सींकों का इस्तेमाल केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इससे जुड़ी धार्मिक आस्था और पौराणिक कथा का प्रतीक भी माना जाता है।









