
(रिपोर्ट : नीरज कुमार जायसवाल, वाराणसी)
वाराणसी– आजादी के 75 वें वर्षगांठ पर देश में अमृत महोत्व के तहत स्वतंत्रता दिवस के दिन पर हर घर तिरंगा फहराने की कवायत की जा रही है। आजादी के इस उत्सव के बीच बहुत से ऐसे लोगों को नहीं पता की आजादी से पहले हमारे देश में तिरंगे को फहराने पर अंग्रेजी हुकूमत ने पाबंदी लगा दी थी।

एक समय ऐसे भी आया कि तिरंगे पर पाबंदी लगाने से देश की आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत से लड़ रहे क्रांतिकारियों का हौसला कम होने लगा था, लेकिन क्रांतिकारियों के आजादी के हौसले को बढ़ाने के लिए काशी के एक मिष्ठान के व्यापारी ने कुछ ऐसा किया जिसे देख सभी हैरान हो गए।

अंग्रेजी हुकूमत ने लगाया तिरंगा पर पाबंदी, बर्फी को दिया गया तिरंगा का रूप…
काशी में चौक क्षेत्र की तंग गलियों में स्थित श्री राम मिष्ठान की दुकान पर देश की आजादी में अपना योगदान देने और क्रांतिकारियों के हौसले को बढ़ाने के लिए एक नायाब तरीका अपना।

मिष्ठान के दुकानदार ने देश की आजादी के प्रति लोगो में जनजागृति के लिए तिरंगी मिठाई बनाई, जो तिरंगे के रंग में रंगा हुआ था और उसे मुफ्त में बटवा दिया गया। मिठाई का रंग पूरी तरह तिरंगे के रूप में था, जिसे देख लोग देश के आजादी के लिए छिड़े आंदोलन में कूद पड़े।
आंदोलन के दौरान तिरंगी बर्फी के जरिए क्रांतिकारियों के पास पहुंचता था संदेश…
तिरंगी बर्फी को आज भी लोगो के द्वारा उतना ही पसंद किया जाता है, जितना आजादी के पहले वर्ष 1940 में किया जाता था। तिरंगी बर्फी को लेकर श्री राम मिष्ठान के संचालक वरुण गुप्ता ने बताया कि तिरंगी बर्फी का निर्माण हर -घर में आजादी के अलख को जागने की सोच को लेकर उनके पूर्वजों ने किया था।

आजादी के आंदोलन के दौरान उनके पूर्वज मदन गोपाल गुप्ता और रघुनाथ दास गुप्ता ने तिरंगी बर्फी का निर्माण किया और साथ ही आजादी के जो नेता थे उनके नाम पर अपने मिठाइयों का नाम रख दिया।

वरुण ने बताया कि एक समय तिरंगे पर पूरी तरफ पाबंदी लगा दिया गया और अंग्रेजी हुकूमत के डर से कोई भी कुछ बोलना नही चाहता था। यही वजह था कि गोपनीय मैसेज को आजादी के दीवानों के पास कैसे पहुंचाया जाए, इसे लेकर तिरंगी बर्फी का निर्माण किया गया।
तिरंगी बर्फी की कहानी जान लोग होते है गौरवान्वित…
बनारस अपने संस्कृति और मिजाज के साथ स्वाद के लिए बेहद ही मशहूर है, लेकिन इन सबके बीच तिरंगी बर्फी और आजादी की यह कहानी बनारस के स्वाद को और भी खास बनाता है।

ऐसे में बनारस की तंग गलियों में देशभर से पर्यटक जब घूमते हुए श्री राम मिष्ठान की दुकान पर पहुंचते और तिरंगी बर्फी की कहानी को जानते तो उन्हें गर्व की अनुभूति होती है।

साथ ही वह हैरान भी होते है कि आजादी के लिए हमारे पूर्वजों ने किस प्रकार अपनी आहूति को दी, जिससे आज हम आजाद देश में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपना जीवन यापन कर रहे है।









