कुंवर दानिश अली ने पत्रकारों पर हमले को लेकर पूछा सरकार से सवाल, जवाब में केंद्र ने राज्य सरकारों पर फोड़ा ठीकरा

प्रश्नों के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय अपना पल्ला झाड़ते हुए राज्य सरकारों पर इस की जिम्मेदारी डाल दी। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत “पुलिस” और “लोक व्यवस्था” राज्य के विषय हैं। पत्रकारों की सुरक्षा सहित कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्राथमिक रूप से संबंधित राज्य सरकारों की होती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) पत्रकारों पर हमलों से जुड़े मामलों के बारे में विशेष आंकड़े नहीं रखता है।

मंगलवार को शीतकालीन सत्र के दौरान यूपी के अमरोहा से सांसद कुंवर दानिश अली ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्रश्न पूछा कि क्या यह सच है कि देश में मीडियाकर्मियों पर हमलों और उनकी हत्या इत्यादि की घटनाएं बढ़ रही हैं? इस सवाल के संबंध में कुंवर दानिश अली ने गत पांच वर्षों में प्रत्येक वर्ष और वर्तमान वर्ष के दौरान राज्य-वार अलग-अलग कुल घायल और मृत पत्रकारों की संख्या का आंकड़ा मांगा। उन्होंने गृह मंत्री से पूछा कि पत्रकारों पर हमला करने वाले ऐसे कितने लोगों को गिरफ्तार किया तथा उनके विरूद्ध क्या कार्रवाई की गई?

इसके अलावा सांसद कुंवर दानिश अली ने ने यह भी पूछा कि क्या सरकार को मीडियाकर्मियों एवं पत्रकारों की सुरक्षा के संबंध में भारतीय प्रेस परिषद से कोई रिपोर्ट अथवा सिफारिशें प्राप्त हुई हैं? और यदि इस सम्बन्ध में सरकार को कोई डाटा मिला है तो सरकार द्वारा इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई है? दानिश अली ने आगे पूछा कि क्या सरकार ने पत्रकारों पर हुए हमलों की जांच करने तथा मामले को निर्धारित समय अवधि में निपटाने के लिए कोई समिति गठित की है? सरकार द्वारा पत्रकारों, ब्लॉगर्स, स्क्राइब्स, रिपोर्टरों, समाचार पत्र कार्यालयों एवं टीवी स्टेशनों की सुरक्षा हेतु अन्य क्या कदम उठाए गए हैं?

सांसद कुंवर दानिश अली के इन प्रश्नों के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय अपना पल्ला झाड़ते हुए राज्य सरकारों पर इस की जिम्मेदारी डाल दी। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत “पुलिस” और “लोक व्यवस्था” राज्य के विषय हैं। पत्रकारों की सुरक्षा सहित कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्राथमिक रूप से संबंधित राज्य सरकारों की होती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) पत्रकारों पर हमलों से जुड़े मामलों के बारे में विशेष आंकड़े नहीं रखता है।

भारत सरकार, भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 में उल्लिखित “बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार” को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के अंतर्गत स्थापित “भारतीय प्रेस परिषद (PCI)”, जो कि एक सांविधिक स्वायत्त निकाय है, प्रेस की स्वतंत्रता को कम करने, पत्रकारों पर शारीरिक हमले या आक्रमण आदि के संबंध में प्रेस द्वारा’ दायर शिकायतों पर विचार करती है। PCI को प्रेस की स्वतंत्रता से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों और इसके उच्च मानकों की रक्षा करने से संबंधित मामलों में स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति भी प्रदान की गई है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने अपने जवाब में आगे कहा, “भारतीय प्रेस परिषद” ने पत्रकारों की सुरक्षा के मामले की जांच करने के लिए एक उपसमिति गठित की थी। उप-समिति द्वारा दिनांक 23 जुलाई 2015 को प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में पत्रकारों की सुरक्षा और संरक्षा के संबंध में विभिन्न सिफारिशें की गई थीं लेकिन आपको मालिम होना चाहिए कि कानून पत्रकारों सहित नागरिकों की रक्षा हेतु पर्याप्त हैं।”

उन्होंने जवाब में आगे कहा कि केंद्र सरकार, पत्रकारों सहित देश के सभी नागरिकों की सुरक्षा एवं संरक्षा को सर्वाधिक महत्व प्रदान करती है। गृह मंत्रालय ने राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने और इसे सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर परामर्शी पत्र जारी किए हैं कि कानून को अपने हाथ में लेने वाले व्यक्ति को कानून के अनुसार तत्काल दंडित किया जाए। विशेष रूप से पत्रकारों की सुरक्षा के संबंध में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को एक एडवाइजरी 20 अक्टूबर, 2017 को भी जारी की गई थी, जिसमें उनसे मीडिया के लोगों की सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून को सख्ती से लागू करने का अनुरोध किया गया था।

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