
दिवाली का पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक परंपरा है। खासकर दिवाली पर मिट्टी के दीपक जलाने का विशेष महत्व है, जो मां लक्ष्मी के आगमन और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने के साथ जुड़ी हुई है, जब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। आइए जानें दिवाली पर मिट्टी के दीपक जलाने के महत्व के बारे में।
मां लक्ष्मी का आगमन और सुख-समृद्धि का प्रतीक
दिवाली पर मिट्टी के दीपक जलाने का धार्मिक महत्व है, क्योंकि माना जाता है कि इससे घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है, जो सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक मानी जाती हैं। दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है ताकि वह घर में आएं और हर प्रकार के कष्ट दूर हों। दीपक के प्रकाश से अंधकार और अज्ञानता का नाश होता है, और जीवन में ज्ञान एवं उजाला आता है।
मिट्टी के दीपक का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दिवाली की रात अगर मिट्टी के दीपक में सरसों का तेल डाला जाए, तो यह शनि ग्रह को मजबूत करता है। वहीं, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मिट्टी के दीपक को गाय के घी से जलाना बहुत शुभ माना जाता है। यही कारण है कि दिवाली की रात पहला दीपक हमेशा मां लक्ष्मी के नाम से जलाने की परंपरा है।
पंचतत्वों का प्रतीक है मिट्टी का दीपक
हिंदू धर्म में मान्यता है कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड पांच तत्वों — जल, वायु, आकाश, अग्नि और भूमि — से बना है, और मिट्टी का दीपक इन पंचतत्वों का प्रतीक है। मिट्टी दीपक के रूप में वर्तमान का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि जलती हुई लौ भूतकाल का और रुई की बत्ती भविष्य का संकेत देती है। दीपक की रोशनी शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक है।









