Lucknow: UP में जांच में फंसे 9 अधिकारियों को मिले अहम ओहदे, मंत्री के जवाब से खुलासा

शर्मिला पटेल का ट्रांसफर औद्योगिक क्षेत्र अनुभाग कानपुर से परिषीजना अधिकारी गाजियाबाद किया गया, जबकि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई..

Lucknow: उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDC) में नौ दागी अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है, जबकि इन अधिकारियों के खिलाफ पिछले 10 से 15 साल से विजिलेंस जांच चल रही है। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब भाजपा एमएलसी द्वारा विधान परिषद में सवाल उठाया गया और औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने इस पर जवाब दिया।

नौकरी में गड़बड़ी के आरोप

जिससे, मंत्री के जवाब से यह साफ हो गया कि इन अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर गुपचुप तरीके से नहीं, बल्कि वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत तैनात किया गया। वर्ष 2023-24 में 12 अधिकारियों के ट्रांसफर हुए हैं, जिनमें से 75% अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं और नौकरी में गड़बड़ी के आरोप हैं। कई अधिकारियों ने नॉन-क्रीमी लेयर का फायदा उठाकर ओबीसी का लाभ लिया और नौकरी हासिल की, जिस पर ऑडिटर जनरल (AG) ने आपत्ति जताई है।

जीरो टॉलरेंस नीति की धज्जियां

दागी अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनाती की हैं। ऐसे में यह स्थिति और भी चिंताजनक बन जाती है क्योंकि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह साफ तौर पर कहा गया था कि संदिग्ध निष्ठा वाले अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात नहीं किया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद इन अधिकारियों को वित्तीय अधिकार दिए गए।

दागी अधिकारियों के ट्रांसफर की लिस्ट:

  1. सीके मौर्या – पीएम अनुभाग मुख्यालय से आरएम आगरा
  2. अजयदीप सिंह – बीपीसीसी मुख्यालय कानपुर से लखनऊ और उन्नाव
  3. प्रदीप कुमार सत्यार्थी – आरएम प्रयागराज से आरएम गाजियाबाद
  4. सीमा सिंह – ट्रोनिका सिटी गाजियाबाद से AHMM अलीगढ़
  5. गेसू – क्षेत्रीय कार्यालय सूरजपुर से क्षेत्र प्रबंधक मुरादाबाद
  6. अजय – आरएम अलीगढ़ से आरएम अयोध्या
  7. मंसूर कटियार – पीपीसीसी मुख्यालय से आरएम बरेली

इन अधिकारियों के खिलाफ बेकलांग भर्ती घोटाला और विजिलेंस जांच चल रही है, जबकि कुछ अधिकारियों पर ऑनलाइन भूखंड आवंटन में गड़बड़ी का आरोप है। जिनमें शर्मिला पटेल का ट्रांसफर औद्योगिक क्षेत्र अनुभाग कानपुर से परिषीजना अधिकारी गाजियाबाद किया गया, जबकि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जारी है। वही विनोद कुमार का ट्रांसफर आंराएम आगरा से आरएम कानपुर किया गया, उन पर ऑनलाइन भूखंड आवंटन में गड़बड़ी का आरोप है।

इनके खिलाफ नहीं कोई जांच

इसके अलावा संतोष कुमार, प्रदीप कुमार कौशिक, और संदीप कुमार का ट्रांसफर किया गया है, लेकिन उनके खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही।

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