मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान की चेतावनी—अगर हमारे बंदरगाहों पर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र के पोर्ट होंगे निशाना

जो भी जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना चाहता है उसे पहले ईरान से अनुमति लेनी होगी। यदि बिना अनुमति जहाज आगे बढ़ता है तो उसे हमला झेलना पड़ सकता है।


मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने बड़ा और सख्त बयान दिया है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार ईरानी सेना के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इज़राइल की सेनाएं ईरान के आर्थिक बंदरगाहों को निशाना बनाती हैं तो ईरान पूरे पश्चिम एशिया के बंदरगाहों और आर्थिक क्षेत्रों पर हमला कर सकता है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRIB के मुताबिक प्रवक्ता ने कहा कि अगर ईरान के बंदरगाहों पर हमला किया गया तो मध्य पूर्व के सभी डॉक, पोर्ट और आर्थिक ज़ोन को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

इसी बीच ईरान की (IRGC) ने फारस की खाड़ी में समुद्री नाकाबंदी और कड़ी कर दी है। ईरानी मीडिया का दावा है कि इस नाकाबंदी के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों को पहले ही निशाना बनाया जा चुका है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक तरह का “नो-मूव ज़ोन” लागू कर दिया गया है।

सरकारी प्रसारक Press TV ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो डॉक्यूमेंट्री साझा की है, जिसमें फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच खड़े कई जहाज दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये जहाज लगभग स्थिर खड़े हैं और अगर वे कुछ मीटर भी आगे बढ़ते हैं तो IRGC उन्हें निशाना बना सकती है।

डॉक्यूमेंट्री में बंदर अब्बास से संचालित तेज रफ्तार नौकाओं को “Defenders of the Persian Gulf” बताया गया है। इसमें यह भी दावा किया गया है कि IRGC ने अब तक 14 ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया है, जिनमें दो अमेरिकी टैंकर भी शामिल बताए गए हैं।

ईरान की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने भी सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना चाहता है उसे पहले ईरान से अनुमति लेनी होगी। यदि बिना अनुमति जहाज आगे बढ़ता है तो उसे हमला झेलना पड़ सकता है।

तंगसीरी के अनुसार बुधवार को दो जहाज—Express Rome और Mayuree Naree—को चेतावनी न मानने के बाद निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक जलमार्ग पूरी तरह ईरान की निगरानी में है और नियमों का पालन न करने वाले जहाजों पर ड्रोन या मिसाइल से हमला किया जा सकता है।

दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल, यानी वैश्विक खपत का लगभग पांचवां हिस्सा, इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है।

इस तनाव के बीच अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने तेल कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 17.2 करोड़ बैरल तेल जारी करने की योजना की घोषणा की है। विभाग के अनुसार अगले सप्ताह से इसकी आपूर्ति शुरू की जाएगी और इसे बाजार तक पहुंचने में लगभग 120 दिन लग सकते हैं।

इसके अलावा (IEA) ने भी आपूर्ति संकट को कम करने के लिए अपने 32 सदस्य देशों के आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है।

हालांकि इन कदमों के बावजूद फारस की खाड़ी में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार कई विदेशी जहाज फिलहाल वहीं खड़े हैं और उन्हें इंजन तक चालू करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। IRGC की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि जहाज निर्धारित सीमा से थोड़ा भी आगे बढ़े तो उस पर तुरंत हवाई हमला किया जा सकता है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव का असर वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है और दुनिया के कई देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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