
वाराणसी। ज्ञानवापी में चल रहे ASI सर्वे को रूकवाने के लिए मुस्लिम पक्ष एक बार फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के अधिवक्ताओं की तरफ से जिला सत्र न्यायालय में याचिका दाखिल कर ASI सर्वे को नियमो के विरुद्ध बताते हुए, तत्काल सर्वे को रोकने की मांग किया है। ASI सर्वे को रोकने के लिए मुस्लिम पक्ष की तरफ से नए दलील दिए गए, जिस पर जिला सत्र न्यायालय ने सुनवाई करते हुए हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं से जवाब मांगा और 17 अगस्त की अगली तारीख नियत की गई है।

मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे की फीस न्यायालय में जमा न करने की दलील, नियमो के विरुद्ध बताया सर्वे का कार्य
मुस्लिम पक्ष की तरफ से जिला आदालत में ASI सर्वे रोके जाने के लिए दी गई याचिका में दलील दिया गया कि ASI सर्वे का कार्य नियमो के विरुद्ध हो रहा है। मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि ASI सर्वे एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और इसमें सरकार का बहुत खर्च होता है। नियमो के अनुसार ASI सर्वे से पहले इसके खर्च को हिंदू पक्ष के द्वारा जमा किया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने बिना फीस जमा किए ही सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है।
ऐसे में ASI सर्वे नियमो के विरुद्ध हो रहा है। इसके साथ ही कई ऐसे प्वाइंट है जिसमे यह दिखता है कि कैसे नियमो की अनदेखी की जा रही है। इसी को लेकर न्यायालय से गुहार लगाया गया है कि ASI सर्वे को तत्काल रूप से रोका जाएगा। वही इस मामले पर जिला न्यायालय ने अगली तारीख 17 अगस्त नियत की है। इस दिन सुनवाई में हिंदू पक्ष के अधिवक्ता अपनी बात न्यायालय के समक्ष रखेंगे।

मीडिया कवरेज पर न्यायालय हुआ सख्त, साक्ष्यों को गोपनीय रखने की कही बात…
वाराणसी के ज्ञानवापी में चल रहे ASI सर्वे की मीडिया रिपोर्टिंग पर मुस्लिम पक्ष की तरफ से आपत्ति दर्ज करवाते हुए जिला अदालत में याचिका दाखिल किया गया था। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सख्त निर्देश दिया है। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने बताया कि मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी के स्पॉट पर जाकर मीडिया की रिपोर्टिंग पर नाराजगी जाहिर किया गया है।
मीडिया के द्वारा साक्ष्यों के मिलने की बात पब्लिक डोमेन में लाए जाने पर भी जिला जज ने नाराजगी व्यक्त किया है। जिला जज की तरफ से ASI सर्वे पर वादी या प्रतिवादी किसी के द्वारा बयाना न देने की बता कही गई है। जिला जज ने कहा कि ASI की रिपोर्ट न्यायालय में पेश होने के पश्चात वादी और प्रतिवादी को नकल दिए जाने के बाद ही मीडिया इसको पब्लिक डोमेन में ला सकती है।
रिपोर्ट-नीरज कुमार जायसवाल









