लोकसभा में सासंद धर्मेंद्र यादव केंद्र सरकार पर जमकर बरसे, एनडीए को दलित, पिछड़ा विरोधी बताया, बीजेपी से रोजगार को लेकर किया सवाल

बजट को लेकर सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि आज देश में 140 करोड़ लोगों में करीब 95 फीसदी जनता पूरी तरह से बर्बाद है। समाज में गरीबों के लिए स्वास्थ्य सबसे जरूरी है, लेकिन सरकार ने उसको घटा दिया।

लोकसभा में आजमगढ़ से सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने एनडीए सरकार पर जमकर बरसे। इस दौरान उन्होंने सरकार मुखर विरोध किया। साथ ही आम बजट 2024-25 को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़ा किया। सांसद धर्मेंद्र यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बारे में कहा कि उन्होंने पूरा जीवन देश-प्रदेश के विकास के लिए पूरा जीवन समर्पित किया। उन्होंने ही समाजवादी विरासत में न्याय और हक की लड़ाई सिखाया, जिसे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मार्गदर्शन में लड़ा जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जब तक मुलायम सिंह का सपना पूरा नहीं होता चुपचाप नहीं बैठेंगे।

एनडीए सरकार को दलित, पिछड़ा विरोधी बताया

बजट को लेकर सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि आज देश में 140 करोड़ लोगों में करीब 95 फीसदी जनता पूरी तरह से बर्बाद है। समाज में गरीबों के लिए स्वास्थ्य सबसे जरूरी है, लेकिन सरकार ने उसको घटा दिया। साथ ही कहा कि यूपीए की सरकार में किसानों का बजट 5.5 फीसदी था, जिसे 2024 में घटाकर 3.15 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा शिक्षा का बजट 2013 में 4.77 फीसदी से घटकर 2.5 फीसदी हो गया है। उन्होंने वर्तमान एनडीए की सरकार को गरीब विरोधी, किसान विरोधी, नौजवान विरोधी, दलित विरोधी, पिछड़ा विरोधी और मजदूर विरोधी बताया। बीजेपी ने चुनावी वादों को पूरा न करके भ्रष्टाचार में वर्ल्ड रिकॉर्ड बना लिया है।

सरकार ने नौजवानों को किया गुमराह

सांसद धर्मेंद्र यादव ने स्वामीनाथन को दिया गया भारत रत्न सम्मान को अधूरा बताया, क्योंकि उनकी सिफारिशों को आज तक लागू नहीं किया गया है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर नौजवानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। साथ ही सरकार से पूछा कि 2014 में हर साल 2 करोड़ रोजगार का वादा करने वाली सरकार का 10 साल में 20 करोड़ नौजवानों का रोजगार कहाँ है। वहीं, बजट में इंटर्नशिप योजना को लेकर कहा कि नौजवान छोटे से इंटर्नशिफ के शगूफे से नौजवान खुश नहीं होंगे। इसके अलावा शिक्षा को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि शिक्षा को प्राइवेट करके, चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में देकर शिक्षा को गरीबों से छीनने का षड्यंत्र किया जा रहा है।

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