उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण, कोविड-19 के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर खास ध्यान

कोविड-19 महामारी ने न केवल देश के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाला है। अवसाद, घबराहट, ...

लखनऊ: कोविड-19 महामारी ने न केवल देश के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाला है। अवसाद, घबराहट, अनिद्रा, नशे की लत और आत्महत्या जैसे गंभीर मानसिक समस्याओं में वृद्धि देखी गई है। हालांकि, सरकारी आंकड़े अधूरे रहे हैं, लेकिन अब राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-2 के माध्यम से इन दावों की सच्चाई परखने का प्रयास किया जा रहा है। इस सर्वे में उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में घर-घर जाकर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य का आकलन किया जाएगा। बागपत, बलिया, बिजनौर और लखनऊ जैसे जिलों को इस अहम सर्वे का हिस्सा बनाया गया है।

10 साल बाद फिर शुरू हुआ मानसिक स्वास्थ्य सर्वे

भारत में पहली बार 2014-16 के दौरान राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि हर सातवां व्यक्ति मानसिक बीमारी से जूझ रहा था। अब, लगभग 10 साल बाद, कोविड-19 के प्रभाव को समझने के लिए दूसरा सर्वेक्षण कराया जा रहा है।

कौन करा रहा है सर्वे और कैसे होगा अमल?

यह सर्वे केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस, बैंगलोर के सहयोग से कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग ने इस सर्वे के संचालन की जिम्मेदारी ली है। प्रशिक्षित टीमें चयनित जिलों में जाकर लोगों से साक्षात्कार करेंगी। लखनऊ नगर निगम को भी इस सर्वे में पूरा सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्वे में किस पर होगा फोकस?

इस सर्वे में खास तौर पर डिप्रेशन, एंग्जायटी, अनिद्रा, शराब और नशे की लत, किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या के विचार और सिजोफ्रेनिया जैसे मामलों पर फोकस किया जाएगा। इस सर्वे का डाटा पूरी तरह से गोपनीय रहेगा।

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