
नई दिल्ली: राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 ने भारतीय खेलों की दिशा को बदलने का वादा किया है। दशकों तक भारतीय खेल संघ अपने-अपने नियमों के तहत कार्य करते रहे, जहां नेतृत्व अक्सर वही लोग संभालते थे और खिलाड़ियों की राय का कोई महत्व नहीं था। अब इस विधेयक के पारित होने से खेल संघों का संचालन पूरी तरह से नए कानून और ढांचे के तहत होगा।
विधेयक का सबसे बड़ा बदलाव खिलाड़ियों की प्रतिनिधित्व है, जिसे अब स्पष्ट रूप से संरचित किया गया है। प्रत्येक राष्ट्रीय खेल निकाय में एक कार्यकारी समिति होगी, जिसमें 15 सदस्य होंगे। इसमें कम से कम दो खिलाड़ी, जो अपनी खेल क्षमता में उत्कृष्ट हों, दो सदस्य जो खिलाड़ियों की समिति से चुने जाएंगे, और चार महिलाएं होंगी। यह सुनिश्चित करेगा कि खिलाड़ी, विशेषकर महिलाएं, उन महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल हों जो उनके करियर से जुड़ी होती हैं, जैसे चयन नीति, कैलेंडर, और अनुशासनात्मक नियम।
इसके अलावा, सरकार द्वारा स्थापित नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (NSB) के तहत खेल प्रशासन, खेल कानून और सार्वजनिक प्रशासन के विशेषज्ञ होंगे। यह बोर्ड खेल संघों को मान्यता देने या निलंबित करने, आचार संहिता जारी करने, और महिला एवं बालकों के लिए सुरक्षित खेल नीतियाँ बनाने के लिए जिम्मेदार होगा। बोर्ड का कार्यक्षेत्र अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों के साथ सहयोग करके और भी व्यापक होगा।
नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल (NST) की स्थापना से खिलाड़ियों के लिए एक और बड़ा सुधार हुआ है। इस ट्रिब्यूनल का उद्देश्य लंबित विवादों को शीघ्र सुलझाना है, और इसके आदेशों को सीधे लागू किया जा सकता है, जैसे नागरिक आदेश। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को खेल पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना है, न कि कानूनी लड़ाइयों में फंसा रहने की चिंता।
पारदर्शिता भी इस विधेयक का अहम हिस्सा है। मान्यता प्राप्त खेल निकाय अब RTI एक्ट के तहत आएंगे, जिससे उनके निर्णय और प्रक्रिया पारदर्शी होगी। इससे खिलाड़ियों, प्रशंसकों, प्रायोजकों और व्यापक खेल समुदाय का विश्वास बढ़ेगा। हालांकि, बीसीसीआई इस एक्ट से बाहर रहेगा क्योंकि यह सरकारी धन से संचालित नहीं होता।
यह विधेयक भारत को उन देशों की कतार में खड़ा करता है, जिन्होंने खिलाड़ियों को गवर्नेंस में हिस्सेदारी दी है, जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देश। विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों के लिए यह विधेयक एक ऐतिहासिक अवसर है, जो उन्हें प्रशासन में बराबरी का हिस्सा देगा और भारतीय खेलों को नए आयाम पर ले जाएगा।
कार्यान्वयन की चुनौती अब इस विधेयक की सफलता का मापदंड होगी। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो खिलाड़ियों को न केवल प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा, बल्कि वे साझीदार भी बनेंगे, जहाँ उत्कृष्टता और समानता दोनों का मिलाजुला रूप होगा।









