नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर बवाल, कांग्रेस नेता जयराम रमेश बोले – ‘बिहार में हुआ लीडरशिप कूप’

2010 के चुनाव में भी एनडीए गठबंधन ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की। हालांकि 2013 में उन्होंने भाजपा से गठबंधन तोड़कर आरजेडी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई।

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने के फैसले पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने इसे बिहार में “लीडरशिप कूप” यानी नेतृत्व परिवर्तन की साजिश करार दिया है और कहा है कि यह जनता के जनादेश के साथ बड़ा विश्वासघात है।

जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बिहार चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस जिस बात की आशंका जता रही थी, वही अब सच होती दिखाई दे रही है। उन्होंने लिखा कि बिहार में नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता परिवर्तन की साजिश रची गई है, जो जनता के जनादेश के खिलाफ है। उनके मुताबिक यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाला है।

दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुष्टि की है कि वह इस बार राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनकर नामांकन दाखिल करेंगे। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह राज्यसभा का सदस्य बनना चाहते हैं और बिहार के विकास के लिए काम करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

नीतीश कुमार ने अपने संदेश में लिखा कि वह पूरी ईमानदारी के साथ जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनका संबंध लोगों से आगे भी बना रहेगा और विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प पहले की तरह मजबूत रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाली सरकार को उनका पूरा समर्थन और मार्गदर्शन मिलेगा।

नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। 75 वर्षीय नीतीश कुमार ने हाल ही में 2025 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने इस चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था और इसके बाद नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने 1985 में जनता दल से विधायक बनकर राजनीति में कदम रखा था। बाद में 1994 में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी का गठन किया। 1996 में वह लोकसभा के लिए चुने गए और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे।

साल 2005 में बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिला और नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने। 2010 के चुनाव में भी एनडीए गठबंधन ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की। हालांकि 2013 में उन्होंने भाजपा से गठबंधन तोड़कर आरजेडी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई।

2014 में उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन 2015 में महागठबंधन की जीत के बाद वह फिर मुख्यमंत्री बन गए। इसके बाद 2017 में उन्होंने आरजेडी से अलग होकर दोबारा एनडीए के साथ सरकार बना ली।

राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का सिलसिला यहीं नहीं रुका। अगस्त 2022 में नीतीश कुमार ने एनडीए छोड़कर फिर से महागठबंधन का साथ दिया, लेकिन जनवरी 2024 में उन्होंने एक बार फिर महागठबंधन से दूरी बनाते हुए भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया और मुख्यमंत्री बने रहे।

अब राज्यसभा जाने के उनके फैसले से बिहार की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। विपक्ष इसे सत्ता परिवर्तन की रणनीति बता रहा है, जबकि एनडीए खेमे का कहना है कि यह राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है और बिहार के विकास के लिए लिया गया निर्णय है।

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