
रामायण के प्रसिद्ध और विवादित पात्रों में शूर्पणखा का नाम प्रमुख है। हालांकि, वह आमतौर पर अपने श्रीराम और लक्ष्मण से जुड़े प्रसंगों के कारण जानी जाती हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि शूर्पणखा विवाहित थी और उसके पति की हत्या उसके भाई रावण ने की थी। यही घटना रामायण की कथा में एक अहम मोड़ साबित हुई, जिसने पूरे युद्ध की नींव रखी।
शूर्पणखा की पहचान और भूमिका
शूर्पणखा, राक्षसराज रावण की बहन थी और उसे वाल्मीकि रामायण में एक उग्र और स्वेच्छाचारी महिला के रूप में वर्णित किया गया है। उसका नाम ‘शूर्पणखा’ का अर्थ ‘सूप जैसे नाखूनों वाली’ है। विभिन्न भाषाओं में उसके नाम के अलग-अलग रूप पाए जाते हैं, जैसे तमिल में सूर्पनगै, मलय में सुरपन्दकी, और इंडोनेशियाई में सर्पकनक।
शूर्पणखा के पति का रहस्य
शूर्पणखा ने कालकेय दानव वंश के राजकुमार विद्युतजिह्वा से गुप्त विवाह किया था। विद्युतजिह्वा एक शक्तिशाली दानव था, जो मायावी विद्या और युद्ध कौशल में माहिर था। राक्षस और दानव एक-दूसरे के शत्रु थे, और शूर्पणखा का दानव राजकुमार से विवाह रावण के लिए अस्वीकार्य था।
रावण ने क्यों की पति की हत्या?
जब रावण को शूर्पणखा के गुप्त विवाह का पता चला, तो उसने इसे अपने परिवार और कुल का अपमान माना। इसके परिणामस्वरूप, रावण ने विद्युतजिह्वा से युद्ध छेड़ दिया और उसे मार डाला। कुछ कथाओं के अनुसार, रावण ने शूर्पणखा को भी मार डालने का विचार किया था, लेकिन उसकी पत्नी मंदोदरी और भाई कुंभकर्ण ने हस्तक्षेप किया, जिससे शूर्पणखा की जान बच गई।
विधवा शूर्पणखा का जीवन
पति की मृत्यु के बाद शूर्पणखा का जीवन पूरी तरह बदल गया। वह गहरे शोक और अपमान से ग्रस्त हो गई, लेकिन मंदोदरी ने उसे नया जीवन शुरू करने की सलाह दी। इसके बाद, शूर्पणखा लंका और दक्षिण भारत के जंगलों में घूमती रही और अपने असुर रिश्तेदारों के साथ रहने लगी।
रामायण के युद्ध की शुरुआत
रामायण की कथा में शूर्पणखा की भूमिका निर्णायक थी। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, शूर्पणखा की भेंट श्रीराम और लक्ष्मण से दंडकारण्य वन में हुई थी। शूर्पणखा ने दोनों से विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद, क्रोध और अपमान में उसने माता सीता पर आक्रमण करने की कोशिश की, और लक्ष्मण ने उसकी नाक और कान काट दिए।
शूर्पणखा ने यह पूरी घटना लंका में रावण को बताई, और रावण ने इसका बदला लेने की प्रतिज्ञा की। यही प्रतिज्ञा सीता हरण और राम-रावण युद्ध का कारण बनी, जो अंततः रावण वध पर समाप्त हुआ। इस प्रकार, शूर्पणखा के पति विद्युतजिह्वा की हत्या रामायण के सबसे बड़े युद्ध की पहली चिंगारी साबित हुई।









