
नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को लोकसभा में ध्वनिमत से खारिज हो गया। दो दिनों तक चली बहस के बाद सदन में प्रस्ताव को ध्वनिमत के लिए रखा गया, जहां बहुमत ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके साथ ही ओम बिरला लोकसभा के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे।
बता दें, यह अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कई विपक्षी दलों के समर्थन से पेश किया था। विपक्ष का आरोप था कि स्पीकर की कार्यप्रणाली में निष्पक्षता की कमी है और विपक्षी नेताओं को बोलने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलता है। हालांकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
वहीं, सदन में बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर का बचाव करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही आपसी विश्वास और नियमों के पालन के आधार पर चलती है। उनके मुताबिक स्पीकर सदन के एक निष्पक्ष संरक्षक होते हैं, जो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अमित शाह ने कहा कि संसद कोई बाजार नहीं है, बल्कि एक संस्था है जहां सभी सदस्यों को नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनी बात रखनी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि स्पीकर के फैसलों पर असहमति जताई जा सकती है, लेकिन उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
वहीं विपक्षी सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में तर्क देते हुए कहा कि संसद में असहमति के लिए जगह कम होती जा रही है। आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि विपक्षी सांसदों को अक्सर यह महसूस होता है कि उन्हें सदन में पर्याप्त सुरक्षा और अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चेयर कभी-कभी सत्तापक्ष के पक्ष में झुकी हुई दिखाई देती है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सांसद विजय कुमार हंसदक ने भी कहा कि जब विपक्षी सांसद बोलते हैं तो अक्सर उन्हें रोका जाता है। वहीं एनसीपी (एसपी) के सांसद बजरंग मनोहर सोनवाने ने कहा कि विपक्ष को पहले से अंदाजा था कि यह प्रस्ताव शायद पारित नहीं होगा, लेकिन इसका उद्देश्य संसद में लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना था।
दो दिनों तक चली इस बहस के बाद आखिरकार सदन ने ध्वनिमत से प्रस्ताव को खारिज कर दिया और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया।









