माइक्रोबियल बायोमार्कर की सहायता से मुँह के कैंसर को प्रारंभिक चरण में ही पहचाना जा सकेगा

यह अध्ययन "अमेरिकन सोसायटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी" के माइक्रोबायोलॉजी स्पेक्ट्रम जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ, कैंसर की जांच और उपचार में नई उम्मीद की किरणें उजागर हो रही हैं। हमारे मुंह में माइक्रो ऑर्गेनिज्म का एक बहुत बड़ा समूह सामान्य रूप से रहता है। कैंसर की बीमारी में यह (माइक्रो ऑर्गेनिज्म) बदल सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कैंसर की प्राथमिक और वृहद स्थिति में माइक्रो ऑर्गेनिज्म का अध्ययन किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि Streptococcus और Rothia जैसे बैक्टीरिया को मुँह के कैंसर के आरंभिक चरण में  माइक्रो बायोमार्कर के रूप में स्थापित किया जा सकता है। अध्ययन में कैंसर की पहचान और उपचार में नए दिशानिर्देशों की संभावना दिखाई है, जो मुँह के कैंसर के मरीजों के लिए नई आशा का स्रोत हो सकता है।

एक विश्वसनीय माध्यमिक अध्ययन के अनुसार, जिसमें KGMU और IMTECH चंडीगढ़ के चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। प्रारंभिक जांच में Streptococcus और Rothia बैक्टीरिया की अधिकता उन रोगियों में पाई गई जो मुँह के कैंसर के संकेतों के शिकार थे।अध्ययन में यह भी खोजा गया कि कैंसर की बढ़ती संभावना के साथ साथ Capnocytophaga जैसे बैक्टीरिया की अधिकता भी बढ़ गई। इससे पता चलता है कि इन बैक्टीरिया के मौजूदा प्रमाण एक आरंभिक कैंसर के संकेत का संकेत दे सकते हैं।

यह अध्ययन “अमेरिकन सोसायटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी” के माइक्रोबायोलॉजी स्पेक्ट्रम जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

इस अध्ययन में डॉ रश्मि कुमार, डॉ राघवेन्द्र प्रताप सिंह, ने सीएसआईआर- इंस्टीटूट ऑफ़ माइक्रोबायोलॉजी टेक्नोलॉजी चंडीगढ़ से तथा डॉ सुधीर सिंह और डॉ समीर गुप्ता ने KGMU से भाग लिया। 

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