पाकिस्तान की AIP पनडुब्बियां अब बन रही इस देश के लिए बड़ा खतरा!, जानिए AIP सिस्टम में ऐसा क्या है खास?

यह सिस्टम पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की बैटरी को रिचार्ज करके, उन्हें अधिक शांत और दुश्मन के रडार से छिपने में बेहतर बनाता है.

पाकिस्तान इन दिनों भारत को कुछ क्षेत्रों में टक्कर देने की कोशिश कर रहा है…वो अपनी सेना के लिए ऐसे सिस्टम लाने की कोशिश कर रहे है. जो तकनीकी तौर पर भारत को पछाड़ सके..इसी कड़ी में पाकिस्तानी नौसेना ने एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन तकनीक को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है…इसलिए एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस चार पनडुब्बियों का संचालन शुरू कर दिया गया है. जिससे भारतीय नौसेना के लिए समुद्र में सुरक्षा की स्थिति कठिन हो सकती है. कहा जाता है कि ये तकनीक पनडुब्बियों को सतह पर आने के बिना लंबे समय तक पानी के नीचे रहने की अनुमति देती है.

खास बात ये है कि पाकिस्तान की ये पनडुब्बियां चीन में बनी हैं. और यह उसकी युआन-श्रेणी (टाइप 039ए) पनडुब्बियों का एक्सपोर्ट वेरिएंट है.जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान ने साल 2015 में चीन से आठ पनडुब्बियां खरीदी थीं, जिनमें से चार पनडुब्बियां अब पाकिस्तान में काम कर रही हैं.

दूसरी ओर भारत की बात करें तो भारत अभी तक AIP तकनीक से लैस अपनी पहली पनडुब्बी का इंतजार कर रहा है.यह स्थिति भारत के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है, क्योंकि पाकिस्तान अब अपनी पनडुब्बियों को अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में तैनात करने की क्षमता रखता है.

भारतीय नौसेना एंटी-सबमरीन वायरफेयर सिस्टम का व्यापक उपयोग करती है, जिसमें P-8I पोसाइडन विमान, स्वदेशी कमोर्ता क्लास शिप और सीहॉक हेलीकॉप्टर शामिल हैं.ये सभी उपकरण पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं, लेकिन पाकिस्तान की AIP पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के लिए एक नई चुनौती साबित हो सकती हैं.

चलिए अब आपको बता दें कि आखिर AIP सिस्टम के पास में होने की खासियत क्या है. तो AIP यानी कि एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन, सिस्टम डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को सतह पर आए बिना या स्नोर्कल का उपयोग किए बिना, हफ्तों तक पानी के नीचे रहने और काम करने में सक्षम बनाता है. यह सिस्टम पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की बैटरी को रिचार्ज करके, उन्हें अधिक शांत और दुश्मन के रडार से छिपने में बेहतर बनाता है. AIP तकनीक के साथ, पनडुब्बियों को हवा लेने के लिए बार-बार सतह पर आने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे उनकी पानी के भीतर रहने की क्षमता बढ़ जाती है. यह पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में बहुत कम शोर पैदा करती है, जिससे दुश्मन के लिए उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.

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