
रिपोर्ट : नीरज कुमार जायसवाल, वाराणसी
वाराणसी : सावन के अधिमास में धर्म की नगरी काशी में हो रही पंचक्रोशी की यात्रा कांग्रेस नेताओं ने पूरा किया. वाराणसी के मणिकर्णिका घाट से कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस के नेताओं ने 5 दिनों में पंचक्रोशी यात्रा को दोबारा मणिकर्णिका घाट पर पहुंच पूरा किया. पंचकोशी यात्रा पूरा होने पर कांग्रेस के नेताओं ने मणिपुर में हो रहे हिंसा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए, भगवान से देश में अमन चैन की कामना किया.

28 जुलाई को कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की मौजूदगी में शुरू हुई थी पंचक्रोशी परिक्रमा…
काशी के मणिकर्णिका घाट से 28 जुलाई को पंजाब कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू की मौजूदगी में कांग्रेस में पंचक्रोशी की यात्रा प्रारंभ की थी. 5 दिनों तक चलने वाले इस यात्रा में वाराणसी कांग्रेस के तमाम पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल रहे. मणिकर्णिका घाट से शुरू हुई यात्रा 5 दिनों तक अलग-अलग पड़ाव पर पहुंची और आखरी दिन मणिकर्णिका घाट पर पहुंचकर समाप्त हुई. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक्रोशी की यात्रा बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार अधिमास में श्रावण मास जुड़ने से इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ गया.

मणिपुर हिंसा की शांति और देश में महिला हिंसा को समाप्त करने की कांग्रेस नेताओं ने प्रार्थना…
पंचक्रोशी यात्रा पूरा होने के पश्चात मणिकर्णिका घाट पर पहुंचे कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष ने विधि – विधान से कांग्रेस नेताओं के साथ पूजन किया. इस दौरान उन्होंने बताया कि 28 जुलाई को शुरू हुई है यात्रा सकुशल संपन्न हो चुकी है. इस यात्रा के संपन्न होने के पश्चात भगवान से प्रार्थना की गई है कि मणिपुर में जो हिंसा चल रही है वह शांत हो. इसके साथ ही मणिपुर सहित देश के विभिन्न राज्यों में महिलाओं के साथ हो रही बर्बरता पर रोक लगे और सभी जाति और धर्म के लोग एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रहे इसकी कामना की गई है.

भगवान श्री राम और पांडवों ने भी किया था पंचक्रोशी यात्रा…
पंचक्रोशी यात्रा को लेकर धार्मिक और पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्री राम और पांडवों ने इस यात्रा को किया था. पौराणिक ग्रंथों में पंचक्रोशी परिक्रमा का उल्लेख मिलता है, जिसमें लंका में रावण के वध के पश्चात भगवान श्रीराम पर ब्रह्म दोष लगा था. जिसकी मुक्ति के लिए भगवान श्रीराम ने पंचक्रोशी की परिक्रमा की थी. वही द्वापर युग में पांडवों ने महाभारत के पश्चात ब्रह्म दोष से बचने के लिए पंचक्रोशी की परिक्रमा पूरा किया था. महाश्मशान मणिकर्णिका घाट से शुरू होने वाली पंचक्रोशी की यात्रा पांच पड़ाव कंदवा, भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर और कपिलधारा होते हुए दोबारा मणिकर्णिका घाट पर पहुंच पूरी होती है. धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के तहत देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में इस यात्रा को श्रद्धालु पंचक्रोशी परिक्रमा करते है.









