कुतुबमीनार परिसर में पूजा अर्चना की मांग वाली याचिका खारिज, कहा- अतीत में ग़लतियां हुई है

रिपोर्ट -अवैस उस्मानी


कुतुबमीनार परिसर में कुव्वुतुल इस्लाम मस्जिद में हिंदू देवताओं की पुनर्स्थापना और पूजा-अर्चना का अधिकार की मांग वाली याचिका दिल्ली की साकेत जिला अदालत ने खारिज कर दिया। जज नेहा शर्मा ने याचिका को खारिज करते हुए कहा इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि अतीत में ग़लतियां हुई है, पर इसके आधार पर वर्तमान और भविष्य की शांति भंग नहीं की जा सकती है।

साकेत कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा भारत का सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इतिहास है। इस पर कई राजवंशों का शासन रहा है। साकेत कोर्ट ने कहा उनकी राय के अनुसार एक बार किसी स्मारक को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया है और सरकार के स्वामित्व में है। साकेत कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि तो याचिकाकर्ता इस बात पर जोर नहीं दे सकते कि पूजा स्थल को वास्तव में और सक्रिय रूप से धार्मिक सेवाओं के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने कुतुबमीनार परिसर में कुव्वुतुल इस्लाम मस्जिद में हिंदू देवताओं की पुनर्स्थापना और पूजा-अर्चना का अधिकार की मांग को लेकर वकील विष्णु जैन हिंदुओं और जैनों के 27 मंदिरों को तोड़कर यह मस्जिद बनाई गई है। जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और भगवान विष्णु को भी इसमें याचिकाकर्ता बनाया गया था।

दरअसल दिल्ली की साकेत कोर्ट में महरौली में कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत उल-इस्लाम मस्जिद के अंदर हिंदू और जैन देवताओं के मंदिर के रूप में बहाली की मांग करने वाली याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया कि हिंदू देवता भगवान विष्णु, जैन देवता तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव और अन्य की ओर से दायर मुकदमे में 27 हिंदू और जैन मंदिरों की बहाली की मांग की गई, जो कुतुब-उद-दीन-ऐबक के आदेश के तहत ध्वस्त, अपवित्र और क्षतिग्रस्त कर दी गई थी।

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