सिडनी डायलाग में बोले पीएम मोदी- अंतर्राष्ट्रीय समुदाय यह सुनिश्चित करें कि क्रिप्टोकरेंसी गलत हाथों में ना जाए

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित हुए एक सम्मेलन ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने वर्चुअल तौर पर भाग लिया। इस सम्मलेन में पीएम ने कई बड़ी बातें की। डिजिटल युग की चुनौतियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि सभी लोकतांत्रिक राष्ट्र इस पर काम करें और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय यह सुनिश्चित करें कि क्रिप्टोकरेंसी गलत हाथों में न जाए, क्योंकि यह हमारे युवाओं को बर्बाद कर सकता है।“

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित हुए एक सम्मेलन ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने वर्चुअल तौर पर भाग लिया। इस सम्मलेन को सिडनी डायलॉग का नाम दिया गया, जिसमें विश्व के कई बड़े नेताओं ने शिरकत की थी। सम्मलेन का मुख्य विषय बदलते दौर के साथ, साइबर और अन्य जरुरी तकनीकों के दुरुपयोग से गिरते कानून व्यवस्था और आधुनिक डिजिटल युग की चुनौतियों पर चर्चा करना था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मलेन में वर्चुअल रूप में जुड़े और उन्होंने साइबर अपराधों और डिजिटल युग की चुनौतियों के विषय में अपनी गहन सोच विश्व समुदाय के समक्ष रखा। अपने इस सम्बोधन में उन्होंने कई बड़ी बातें की। क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि सभी लोकतांत्रिक राष्ट्र इस पर काम करें और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय यह सुनिश्चित करें कि यह गलत हाथों में न जाए, क्योंकि यह हमारे युवाओं को बर्बाद कर सकता है।“

पीएम ने अपने सम्बोधन में कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र निजी निवेश के लिए खुला है और कृषि क्षेत्र डिजिटल क्रांति का लाभ उठा रहा है।
पीएम के भाषण में प्रौद्योगिकी और डेटा के खतरों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया की किस तरह से इसको “हथियारों” के नए रूपों में बदल दिया जाता था। उन्होंने आगे कहा कि बिटकॉइन का संदर्भ चर्चा में तब आया जब कुछ दिनों पहले ही संसद समिति ने बिटकॉइन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की डिजिटल क्रांति में उछाल पर भी प्रकाश डाला और कहा कि हमारी डिजिटल प्रणाली “व्यक्तिगत अधिकारों” का ख्याल रखती है। उन्होंने आगे कहा, “भारत की डिजिटल क्रांति हमारे लोकतंत्र, हमारी जनसांख्यिकी और हमारी अर्थव्यवस्था के पैमाने में निहित है। डिजिटल युग हमारे चारों ओर सब कुछ बदल रहा है। इसने राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज को फिर से परिभाषित किया है। यह संप्रभुता, शासन, नैतिकता, कानून, अधिकारों और सुरक्षा पर नए सवाल उठा रहा है।”

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