लोकसभा में पीएम मोदी का बड़ा बयान: मिडिल ईस्ट युद्ध से दुनिया प्रभावित, भारत ने तैयार की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति

उन्होंने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60 प्रतिशत LPG आयात करता है और कुल मिलाकर 41 देशों से ऊर्जा उत्पाद मंगाता है।

नई दिल्ली में लोकसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान हालात पूरी दुनिया के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस क्षेत्र में जारी युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कच्चा तेल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी संसाधन बड़ी मात्रा में इसी क्षेत्र से आते हैं, जिससे भारत समेत कई देशों की निर्भरता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि एक करोड़ से अधिक भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं और भारत के इन देशों से अच्छे संबंध हैं, जिसके चलते प्रभावित भारतीयों को हर संभव मदद दी जा रही है।

पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60 प्रतिशत LPG आयात करता है और कुल मिलाकर 41 देशों से ऊर्जा उत्पाद मंगाता है।

प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि देश के पास वर्तमान में 53 लाख मीट्रिक टन पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है, जिससे आपूर्ति को लेकर तत्काल कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं।

उन्होंने रेलवे के विद्युतीकरण और एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम हुई है। साथ ही, वैकल्पिक ईंधन के उपयोग से देश को भविष्य में ऊर्जा संकट से बचाने में मदद मिलेगी।

खाद्य सुरक्षा पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था है और पिछले 10 वर्षों में 6 नए यूरिया प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।

प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि यह युद्ध जल्द से जल्द खत्म होना चाहिए, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और वैश्विक शांति के लिए इसे रोकना बेहद जरूरी है।

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