
वाराणसी- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान बटुकों की शिखा खींचे जाने का मामला राजनैतिक रूप ले लिया है। एक तरफ इस मामले को लेकर जहां सपा और कांग्रेस के बाद डिप्टी सीएम के साथ तामम बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इसकी निंदा किया। ऐसे में अब तक इस मामले में किसी जिम्मेदार अधिकारी के ऊपर कार्रवाई न होने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ हत्या रोकने और बटुकों के ऊपर हुए अत्याचार के खिलाफ धर्म युद्ध का ऐलान कर दिया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने धर्म युद्ध के लिए धर्म युद्ध बोर्ड जारी किया है। जिसका शीर्षक उन्होंने दो भागो में बांटा है। जिसमें पहले भाग में गाय, सत्य और शंकराचार्य के साथ रहने वाले और दूसरे भाग में आय, सत्ता और मुख्यमंत्री के साथ हूं बताया है। इस धर्म युद्ध बोर्ड को 1 मार्च को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के द्वारा सार्वजनिक रूप से जारी किया जाएगा।

देश के सभी संत और महात्मा तय करे अपना पक्ष, 1 मार्च तक का है समय : अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के द्वारा सीएम योगी से उत्तर प्रदेश में गाय को राज्यमाता घोषित किए जाने का अल्टीमेटम दिए जाने पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा था कि वह शंकराचार्य के साथ नहीं है वह मुख्यमंत्री के साथ है और शंकराचार्य एजेंडा चला रहे है।

इसे लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि यदि शंकराचार्य गौ माता की रक्षा के लिए लड़ रहे है, तो वह साथ क्यों नहीं है और जो सीएम के ऊपर प्रश्नचिन्ह लगा है उसके साथ वह क्यों है ? ऐसे में उनके ऊपर भी सवाल खड़ा होता है, लेकिन उन्होंने अपनी बात साफ-साफ कह दिया है। इस लिए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को विपक्ष में रखा गया है। इसी देश के सभी संत और महात्मा तय कर लें कि वह किधर रहेंगे। 1 मार्च तक सभी अपना पक्ष तय कर ले, जब 1 मार्च को धर्म युद्ध शुरू होगा तो कम से कम जनता को यह ज्ञात हो कि कौन किस तरफ है।
रिपोर्ट : नीरज कुमार जायसवाल









