
त्तराखंड के हरिद्वार में कुंभ मेला 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेला प्रशासन शहर के पौराणिक और धार्मिक स्थलों को उनके मूल स्वरूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसी क्रम में महाभारत काल से जुड़ा भीमगोड़ा कुंड अब पुनर्विकास की प्रक्रिया से गुजरने वाला है।
मेला अधिकारी के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने हाल ही में भीमगोड़ा कुंड का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद इस स्थल के विकास कार्यों के लिए विस्तृत स्टीमेट (अनुमानित लागत) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भीमगोड़ा कुंड का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि जब पांडव स्वर्गारोहण के लिए हिमालय की ओर जा रहे थे, तब भीम ने अपने घुटने से जमीन पर प्रहार किया था, जिससे यहां जल की धारा निकल आई और यह कुंड बन गया।
यह पौराणिक स्थल हर की पैड़ी से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रसिद्ध है। कुंभ और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और स्नान के लिए पहुंचते हैं।
प्रशासन का मानना है कि कुंभ 2027 से पहले इस स्थान का पुनर्विकास होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थल की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान भी और मजबूत होगी। इसके तहत क्षेत्र की साफ-सफाई, संरचना सुधार और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
मेला प्रशासन का उद्देश्य यह भी है कि कुंभ मेले के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को हरिद्वार के प्रमुख पौराणिक स्थलों के दर्शन सहज और व्यवस्थित तरीके से हो सकें।









