
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन प्रदेश की सियासत में चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार करने में जुट गए हैं। खासतौर पर INDIA गठबंधन के दो प्रमुख सहयोगी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर तालमेल की चुनौती सामने आती दिखाई दे रही है। ऐसे में यूपी की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका चर्चा के केंद्र में आ गई है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव में मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों दलों के बीच गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा हुआ था और चुनाव में INDIA गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इस राजनीतिक तालमेल के बाद अब दोनों दलों के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। हालांकि, विधानसभा चुनाव में सीटों का गणित लोकसभा चुनाव से काफी अलग होता है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर दावेदारी और स्थानीय राजनीतिक समीकरण दोनों दलों के बीच बातचीत को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं।
कांग्रेस की ओर से प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। वहीं समाजवादी पार्टी भी प्रदेश में अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों की अपेक्षाएं अलग-अलग हो सकती हैं। यही वजह है कि गठबंधन की संभावनाओं के बीच सीटों को लेकर खींचतान की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका अहम मानी जा रही है। कांग्रेस महासचिव होने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रियता और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से उनकी सीधी पहुंच उन्हें महत्वपूर्ण बनाती है। माना जा रहा है कि अगर सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर सहमति बनाने में कोई बड़ी भूमिका सामने आती है, तो प्रियंका गांधी इस बातचीत में अहम कड़ी साबित हो सकती हैं। हालांकि, अभी तक सीट बंटवारे को लेकर किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रियंका गांधी सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की गांठ खोल पाएंगी? क्या दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर साथ मिलकर मैदान में उतरेंगे? या फिर सीटों की दावेदारी और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं INDIA गठबंधन के सामने नई मुश्किलें खड़ी करेंगी?
फिलहाल, 2027 के चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के रिश्तों की परीक्षा शुरू होती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं के बयान, बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों से गठबंधन की दिशा काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।









