CEL का निजीकरण : 1 हजार परिवारों पर लटकी बेरोजगारी की तलवार, सरकारी विभागों की जांच में अटकी फर्म को CEL की मिलेगी कमान…

सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी नामी प्रॉफिट मेकिंग सार्वजनिक संस्था को जिस निजी फाइनान्स कंपनी को बेची का रही है, वो M/S Nandal Finance and Non Banking Finance Co. Leasing Pvt. Ltd. दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन पार्ट - 2 में एक कमरे में संचालित है जिसकी महीने का किराया 17,700 रुपये हैं।

रिपोर्ट – लोकेश राय

भारत के रक्षा और रेलवे सुरक्षा के लिए कार्य करने वाली पब्लिक सेक्टर यूनिट सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) की विनिवेश प्रक्रिया में बड़ी खामियां मिली है। जिस निजी कंपनी को CEL को देने का फैसला किया गया है, वो खुद देश की मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स फ्रॉड की जांच में फंसी है। वैसे भी देश में पहली बार है जब मुनाफा देने वाली कंपनी को निजी हाथों में देने की तैयारी है। तमाम खामियों के सामने आने बाद ग़ाज़ियाबाद के बीजेपी के निगम पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने प्रक्रिया को नए सिरे से करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। गाजियाबाद कद साहिबाबाद साइट 4 में स्थित सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड भारत सरकार को मुनाफा कमाने वाली संस्था है। इसे निजी हाथों में देने से 1000 से अधिक परिवारों पर बेरोजगारी का संकट पैदा होगा। इसको लेकर CEL से जुड़ी हुई मजदूर यूनियन भी विरोध कर रही है और उन्होंने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

2900 करोड़ की एसेट वाली CEL को महज 210 करोड़ के बेचने की तैयारी

सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की साहिबाबाद कंपनी 50 एकड़ में बनी है जिसकी जमीन का उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम(UPSIDC)की मौजूदा दर से कीमत 440.45 करोड़ है। इसके अलावा बिल्डिंग, टर्नओवर, प्रॉफिट, आर्डर समेत अन्य मदो में तकरीबन 2,450 करोड़ की आमदनी और एसेट्स भी है। ऐसे में निजी फर्म को सरकारी वैलुअर्स के द्वारा कम कीमत महज 194 करोड़ आंकी गयी है। (Transection advisor and asset valuer) की और अधिकारियों की आपस मे मिलीभगत के कारण ही 2900 करोड़ की एसेट की कंपनी की actual वैल्यूएशन कम दिखाई गई है। जिसकी जांच की मांग की गई हैं। जिससे सरकार को आर्थिक हानि भी होगी।

एक कमरे में संचालित कंपनी को बेची जा रही है CEL

सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी नामी प्रॉफिट मेकिंग सार्वजनिक संस्था को जिस निजी फाइनान्स कंपनी को बेची का रही है, वो M/S Nandal Finance and Non Banking Finance Co. Leasing Pvt. Ltd. दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन पार्ट – 2 में एक कमरे में संचालित है जिसकी महीने का किराया 17,700 रुपये हैं। ये जानकारी राजेन्द्र त्यागी द्वारा Registrar of company act(ROC) से वेबसाइट से मिली।जानकारी के आधार पर उपलब्ध कराई गई हैं। इस कंपनी के 99.96 %शेयर मैसर्स premiere Furniture and interior private limited नाम की कंपनी के हैं। इस कंपनी के पास एसेट के तौर पर केवल 4 करोड़ ही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच में कंपनी की वित्तीय हालत ठीक नही बताई गई है क्योंकि कंपनी के द्वारा एडवांस टैक्स के कंप्लायंस भी नही कराए गए है। जिसके चलते कंपनी का केस NCLT में विचाराधीन था। राजेन्द्र त्यागी ने सवाल उठाए है कि आखिर ऐसी कंपनी को कैसे CEL जैसी कंपनी को बेचा जा रहा हैं।

सीईएल कंपनी को खरीदने के लिए जिन दो कंपनियों ने फाइनेंशियल बिड दी थी,उसमें से एक M/S Nandal Finance and Non Banking Finance Co. Leasing Pvt. Ltd. है तो दूसरी M/s JPM industries hain. Nandal finance के डायरेक्टर प्रशांत गुप्ता है जब इसी कंपनी की सिस्टर कंसर्न M/s शारदा टेक प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर प्रशांत गुप्ता और अनिरुद्ध मिंडा है। इसके अलावा जेपीएम इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर भारत भूषण माथुर हैं, साथ ही जे पी एम पावर लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर अनिरुद्ध मिंडा और भारत भूषण माथुर है। इससे प्रशांत गुप्ता और भारत भूषण माथुर के संबंध उजागर होते हैं। यह दोनों कंपनियां के डायरेक्टर्स एक दूसरे को भली-भांति जानते हैं। ऐसे में दोनों ही कंपनी के हैं आपसी मिलीभगत की बिल्डिंग के दौरान पूरी संभावना है और इससे बिडिंग प्रोसेस की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

राष्ट्रीय सैनिक संस्थान ने CEL के निजीकरण का किया विरोध

राष्ट्रीय सैनिक संस्थान के अध्यक्ष रिटायर्ड कर्नल तेजेंद्र पाल सिंह त्यागी ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड कंपनी के निजीकरण का विरोध किया है उनका कहना है कि सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड भारत के डिफेंस सेक्टर के साथ-साथ रेलवे के बेहद अहम उपकरण बनाती है यही एक ऐसी इंडस्ट्री है जो एक खास एलाय बनाती है जिसमे कैडमियम, जिंक और टेल्युराइड का इस्तेमाल होता है जिससे सेमीकंडक्टर बनते हैं ऐसे में भारत के रक्षा से संबंधित उपकरण बनाने वाली कंपनी को के निजी हाथों में दिया जाएगा तो फिर देश की सुरक्षा को भेज खतरा होगा, चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए सरकार को CEL को निजी हाथों में जाने से रोकना होगा। क्योंकि यही कंपनी भारत मे बयँ रहे दो डिफेंस कॉरिडोर की मांग की प्रतिपूर्ति कर सकती हैं।

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