
Uttar-Pradesh: रायबरेली में चुनावी प्रक्रिया को लेकर अब सवाल जोरों शोरों से समाज के बीच उठने लगे हैं। वहीं, अब गाजियाबाद के बाद अब रायबरेली में भी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर विरोध शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को एक पत्र लिखकर कई गंभीर आरोप लगाए।
बता दें, वीरेंद्र यादव ने पत्र में फार्म-7 के दुरुपयोग को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि बीजेपी नेताओं ने फर्जी तरीके से फार्म-7 का वितरण किया और इस दौरान मृत मतदाताओं को जीवित दर्शाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए यह सब साजिश के तहत किया गया था।
वहीं, सपा जिलाध्यक्ष ने आगे आरोप लगाया कि कुछ बीजेपी नेताओं ने अधिकारियों की मदद से यह काम किया और फर्जी फार्म-7 का वितरण किया। इसके बाद उन्होंने प्रशासन से इन आरोपों पर कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि इनका कोई आधार नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शिता के साथ की जा रही है और किसी भी तरह की गलत कार्रवाई नहीं की गई है।
यह मामला अब राजनीतिक गर्मी बढ़ाने का कारण बन गया है और जिले में कई तरह के विवाद उत्पन्न हो गए हैं। विपक्षी दल सपा ने प्रशासन पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए अपनी सफाई दी है।
इस मामले पर और जांच की जरूरत को लेकर अब सपा के नेताओं ने आगामी दिनों में सड़कों पर उतरने की धमकी दी है। यह मामला अब चुनावी राजनीति का एक अहम मुद्दा बन चुका है।









