
डिजिटल डेस्क- शतरंज की दुनिया में अचानक से एक भारतीय नाम की गूंज काफी ज्यादा सुनाई देने लगी.वो नाम है रमेशबाबू प्रग्गनानंद… जिन्होंने इतनी कम उम्र में शतरंज का ऐसा खेल खेला,कि लोगों का दिल ही जीत लिया.
अजरबैजान के बाकू में आयोजित हुए शतरंज वर्ल्ड कप में भारत के रमेशबाबू प्रग्गनानंद ने भले ही आखिरी बाजी हारी हो. पर उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से दुनिया में सभी का दिल जीत लिया. और हर कोई उसके खेल को देखकर वाह..वाह करने लगा.
हालांकि कहा जा रहा है कि वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबल भी काफी अच्छा रहा था. रमेशबाबू ने स्टार खिलाड़ी को खेल में आसानी से जीतने नहीं दिया. शतरंज के युवा स्टार रमेशबाबू ने नंबर वन खिलाड़ी नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन को कड़ी टक्कर दी. मैग्नस कार्लसन को उन्होंने आसानी से जीतने नहीं दिया.उन्होंने खेल के दौरान अच्छा खेलते हुए मुकाबले को टाईब्रेकर तक पहुंचाया. और टाईब्रेकर में ही इस मुकाबले को उन्होंने गंवा दिया.
केवल 18 साल की उम्र में उन्होंने फिडे शतरंज विश्व कप टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाने में कामयबा रहे. शतरंज के खेल में विश्व कप फाइनल तक पहुंचने वाले प्रग्गनानंद दूसरे भारतीय बन गए हैं.इससे पहले इस पायदान तक केवल विश्वनाथन आनंद ही पहुंच पाए हैं.
बता दें कि 10 अगस्त 2005 को चेन्नई, तमिलनाडु में जन्में रमेशबाबू प्रग्गनानंद ने साल 2013 में वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिपर अंडर-8 का खिताब जीता था. खास बात ये भी है कि रमेश के हर मुकाबले में मां साथ होती है.शतरंज के बादशाह गैरी कॉस्पोरो तो कहते हैं की रमेश बाबू को उनकी मां का ये सपोर्ट एक अलग आत्म विश्वास देता है. दोनों की जोड़ी को वर्ल्ड कप में बेहिसाब मोहब्बत मिली.
इसके अलावा बता दें कि टूर्नामेंट में वितेजा रहे कार्लसन को 91 लाख और उपविजेता रहे प्रग्गनानंद को 66 लाख नकद पुरस्कार मिला. शतरंज के दिग्गज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद के बाद विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने 18 साल के प्रग्गनानंद गुरुवार को टाई ब्रेक में कार्लसन से 0.5-1.5 से हार गए है.









