
भारत की फिनटेक कंपनी रेजरपे ने एक नया AI-बेस्ड प्लेटफॉर्म रेजरपे एजेंट स्टूडियो लॉन्च किया है, जो कंपनियों को अपने ऑपरेशनल कामों के लिए ऑटोनॉमस AI एजेंट तैनात करने की सुविधा देगा। कंपनी का दावा है कि यह पेमेंट सिस्टम पर आधारित दुनिया का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म है जो कई बिजनेस आइडिया को ऑटोमैटिक बना सकता है।
कंपनी के CEO और को-फाउंडर हर्षिल माथुर ने FTX 2026 इवेंट के दौरान बताया कि यह प्लेटफॉर्म छोटी और मीडियम कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों के पास इन कामों के लिए अलग-अलग टीमें होती हैं, लेकिन छोटी कंपनियों के पास इतने रिसोर्स नहीं होते। ऐसे में AI एजेंट उनकी कई सर्विसेज को संभाल सकते हैं।
हर्षिल माथुर के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनियां आसानी से AI एजेंट तैयार कर सकती हैं जो डिस्प्यूट मैनेजमेंट, पेमेंट रिकवरी, कार्ड एबैंडनमेंट रिकवरी और पेमेंट रिकंसिलिएशन जैसे कई काम खुद ही संभाल सकते हैं। इससे बिजनेस ऑपरेशन ज्यादा तेज और कुशल हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि AI एजेंट पूरी तरह से ऑटोनॉमस तरीकों से काम कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी ग्राहक ने पेमेंट को लेकर विवाद किया है तो AI एजेंट खुद ही पेमेंट की स्थिति, ऑर्डर प्लेटफॉर्म जैसे Shopify और लॉजिस्टिक्स कंपनियों से डिलीवरी का प्रमाण जांच सकता है। इससे पूरा विवाद समाधान प्रक्रिया स्वचालित हो सकती है।
कंपनी ने इसके साथ “एजेंटिक कॉमर्स” नाम की एक नई सुविधा भी पेश की है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता चैट इंटरफेस के माध्यम से ऐप के अंदर ही खरीदारी कर सकता है। उदाहरण के तौर पर उपयोगकर्ता Zomato ऐप में चैट के माध्यम से ऑर्डर दे सकता है और AI एजेंट खुद ही ऑर्डर पूरा कर सकता है।
तकनीकी रूप से भी Razorpay ने डेवलपर्स के लिए इस प्लेटफॉर्म को बेहद आसान बनाया है। हर्षिल माथुर ने बताया कि नई प्रणाली के माध्यम से इंटीग्रेशन की प्रक्रिया काफी सरल हो गई है और इसे दो मिनट से भी कम समय में पूरा किया जा सकता है।
सुरक्षा के मामले में भी कंपनी ने AI का इस्तेमाल बढ़ाया है। CEO के अनुसार अब Razorpay प्लेटफॉर्म पर होने वाले हर ट्रांजैक्शन पर AI एजेंट नजर रखते हैं और किसी भी संदिग्ध देनदारी को पहचान कर संभावित धोखाधड़ी को पहले ही रोक सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उपयोगकर्ताओं की वित्तीय जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है क्योंकि एआई एजेंट को सूचित डेटा तक सीधी पहुंच नहीं होती और सभी लेनदेन केवल उपयोगकर्ता की अनुमति के दायरे में ही होते हैं।









