
New Delhi: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर जारी बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शनों के बीच, केंद्र सरकार आज इसे लोकसभा में नए सिरे से पेश करने जा रही है। इस विधेयक पर चर्चा के लिए संसद में एक तगड़ी लड़ाई का माहौल बन गया है, जहां सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत अन्य दल अपने सांसदों को व्हिप जारी कर चुके हैं, ताकि वे सदन में उपस्थित रहें और इस विधेयक पर अपने रुख को मजबूती से प्रस्तुत कर सकें।
लोकसभा में बिल पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक में इस विधेयक पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय निर्धारित किया गया है। हालांकि, विपक्ष ने इस समय को बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग की थी, जिसे ठुकरा दिया गया। इस विधेयक को लेकर संसद में हंगामे की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि विपक्षी दल इसे एक विभाजनकारी कदम मानते हैं।

विधेयक के समर्थन में कौन-कौन?
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर एनडीए के सहयोगी दल, जैसे जेडीयू, टीडीपी और एलजेपी, सरकार का समर्थन कर रहे हैं। टीडीपी ने अपने सांसदों को इस विधेयक के समर्थन में व्हिप जारी कर दिया है, और माना जा रहा है कि विधेयक का लोकसभा से पारित होना अब एक औपचारिकता जैसी बात है। एनडीए के साथ कई छोटे दलों के समर्थन से सरकार को आत्मविश्वास है कि विधेयक आसानी से पारित हो जाएगा।

विपक्षी दलों का विरोध
विपक्षी दल इस विधेयक को लेकर लगातार विरोध जताते रहे हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, और अन्य विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यक विरोधी और संविधान विरोधी मानते हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अपने सांसदों को इस विधेयक का विरोध करने के लिए व्हिप जारी किया है। विपक्ष ने मंगलवार शाम को इस पर अपनी रणनीति बनाने के लिए बैठक की थी, जिसमें इंडिया गठबंधन के सभी घटक दल शामिल हुए थे।

राज्यसभा में भी इस विधेयक पर चर्चा की संभावना
राज्यसभा में भी इस विधेयक पर चर्चा की उम्मीद जताई जा रही है, और माना जा रहा है कि वहां भी विधेयक पास हो सकता है, बशर्ते एनडीए के सहयोगी दलों का समर्थन बना रहे। लोकसभा में एनडीए के पास 293 सदस्य हैं, जबकि बहुमत के लिए 272 की आवश्यकता है, वहीं राज्यसभा में एनडीए के पास 119 सदस्य हैं और बहुमत के लिए 118 का समर्थन चाहिए। बीजेडी, बीआरएस, और वाईएसआर कांग्रेस के रुख का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन इनके समर्थन से विधेयक की राह आसान हो सकती है।

विपक्ष की योजना: अदालत का रुख
विपक्ष के सांसदों का मानना है कि इस विधेयक को संसद में रोकना संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने अदालत जाने का मन बना लिया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने घोषणा की है कि अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो वे इसे अदालत में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ है और इसे संविधान विरोधी मानते हैं।

विधेयक का उद्देश्य और उद्देश्यों पर विवाद
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करना और वक्फ कानूनों की खामियों को दूर करना है। इसमें वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, सर्वेक्षण और अतिक्रमणों को हटाने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया गया है। साथ ही, यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं और अन्य समुदायों के लिए भी अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का दावा करता है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि यह विधेयक भेदभाव और अन्याय पर आधारित है और संविधान के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। वे इसे वक्फ संपत्तियों को जब्त करने और उन्हें नष्ट करने का रास्ता मानते हैं।
संशोधन और बदलाव का ब्योरा
इस विधेयक में वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन के जरिए वक्फ बोर्डों की संरचना में बदलाव करने, पंजीकरण प्रक्रिया को सशक्त बनाने और तकनीकी सुधार लाने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। विधेयक में वक्फ संपत्तियों के मालिकाना हक, उनके संरक्षण और हदबंदी को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं, जिससे विवाद और अतिक्रमण को रोका जा सके।

लोकसभा में हंगामे की संभावना
इस विधेयक को लेकर बुधवार को लोकसभा में जबरदस्त हंगामा हो सकता है, क्योंकि विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ और समाज में असंतोष फैलाने वाला मानते हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर अपनी पुरानी स्थिति बनाए रखते हुए इसका विरोध करने का ऐलान किया है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस विधेयक के खिलाफ संभावित टकराव के संकेत दिए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद में इस विधेयक के पक्ष और विपक्ष के बीच कौन सी दिशा में परिणाम आता है।