
Jammu and Kashmir: उधमपुर जिले के कावा गांव से एक घायल सांभर हिरण को वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन डिपार्टमेंट द्वारा रविवार को सफलतापूर्वक बचाया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में गांववालों और वाइल्डलाइफ टीम ने मिलकर तीन से चार घंटे की मेहनत से हिरण को सुरक्षित रूप से बचाया।
घनी झाड़ियों में छिपे इस 120 किलो ग्राम से ज्यादा वज़न वाले सांभर हिरण को सबसे पहले ग्रामीणों ने देखा, जिन्होंने तुरंत अधिकारियों को सूचित किया। वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से इस घायल हिरण को बचाया।
बता दें, रेस्क्यू ऑपरेशन में गांववालों की बड़ी मदद मिली। टीम ने कई घंटे की कड़ी मेहनत के बाद घायल हिरण को सुरक्षित पकड़ने में सफलता हासिल की। रेस्क्यू टीम ने बताया कि इस ऑपरेशन में 20-30 लोगों ने मिलकर मदद की। टांडे रख पार्क में प्राथमिक चिकित्सा मिलने के बाद, घायल हिरण को जम्मू के मांडा ज़ू में इलाज और रिहैबिलिटेशन के लिए भेजा गया।
वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम के इंचार्ज नरोत्तम शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हिरण को किसी शिकारी के हमले के बाद चोटें आई थीं। यह घायल सांभर हिरण लगभग 130 किलो वज़न का था। हमारी टीम और स्थानीय लोगों ने इसे रेस्क्यू करने में अहम भूमिका निभाई। इस ऑपरेशन में लोगों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण था, उनके बिना यह संभव नहीं होता।”
वहीं, नरोत्तम शर्मा ने आगे कहा, “हमने सभी उपलब्ध उपकरणों का सही इस्तेमाल किया और स्थानीय लोगों की मदद से इस हिरण को वैन में लोड किया। यह जगह पहाड़ी इलाके में थी, इसलिए रेस्क्यू टीम के साथ गांववाले भी इसमें शामिल हुए। अब, हिरण को उपचार के लिए मांडा ज़ू भेजा जाएगा। हमारी वेटेरिनरी टीम वहां तैयार है।”
शर्मा ने बताया कि इस सांभर हिरण के चेहरे पर गहरे घाव थे, जिसके कारण वह काफी चिढ़चिढ़ा हो गया था और इधर-उधर भाग रहा था। हालांकि, समुदाय के सहयोग से उसे सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह संभावना है कि हिरण पर किसी जंगली शिकारी ने हमला किया था, क्योंकि इसके गाल पर गहरा घाव था।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन स्थानीय समुदाय और वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट की मिलीजुली मेहनत का उदाहरण है। इसने दिखाया कि अगर लोग और अधिकारी एक साथ मिलकर काम करें, तो किसी भी जंगली जानवर को बचाने में सफलता हासिल की जा सकती है।









