संवेदनहीन पहरुये : बुलंदशहर नाबालिग रेप कांड में दिल्ली महिला आयोग की चिट्ठी से हड़कंप, रातों-रात बढ़ाई गई रेप की धारा

बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश में जब ओपी सिंह पुलिस महानिदेशक थे तब पुलिस की संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए बाकायदा कक्षाएं चलाई गई। लेकिन पुलिसवाले इन सबक में नसीहत का पाठ नही सीख सके। नजीर बुलंदशहर में मिली है जहां 12 साल की बच्ची से रेप के बाद केस को छेड़छाड़ और धारा 307 के अंतर्गत दर्ज किया गया था। गंभीर हालत में बच्ची को दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां दिल्ली महिला आयोग की टीम ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की। उन्हें जब पुलिस की करतूत पता चली तो आयोग की अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पुलिस की कारगुजारियों से भरी चिट्ठी लिखी है।

वारदात 15 अक्टूबर की है जब बुलंदशहर के अहमदगढ़ इलाके में 12 साल की एक बच्ची के साथ 45 साल के दरिंदे ने रेप किया। बच्ची चीखी चिल्लाई तो उसके ऊपर भारी चीज से प्रहार किया गया। उसे कत्ल करने की कोशिश की गई। बच्ची किसी तरह बच गई और आरोपी मौके से फरार हो गया। लेकिन वारदात के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस का बेरहम चेहरा पीड़ित परिवार को खौफजदा किए रहा। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस तो दर्ज किया लेकिन बलात्कार के बजाय छेड़छाड़ की धारा लगा दी। बच्ची की हालत गंभीर थी इसलिए परिजन उसे बचाने की जद्दोजहद में जुटे रहे और पुलिस चैन की चादर तानकर सोती रही।

बच्ची को बुलंदशहर के पहासू सीएचसी में भर्ती कराया गया जहां से उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी इसलिए मेरठ मेडिकल कॉलेज में उसे दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। दिल्ली के एक अस्पताल में बच्ची का इलाज चल रहा है और अभी वह जिंदगी मौत के बीच जूझ रही है। दिल्ली महिला आयोग को जब इस मामले की खबर हुई तो आयोग की टीम अस्पताल पहुंची और परिजनों से वारदात की जानकारी ली। आयोग की टीम को डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है लेकिन इस मामले में पुलिस की कार्रवाई रुकी हुई है। यहां तक कि केस का विवेचक मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट का अवलोकन करने तक नहीं आया है।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक चिट्ठी लिखी और पुलिस की कारगुजारी से उन्हें अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने इस मामले में आला अधिकारियों को तलब किया। तब जाकर एसएसपी ने मंगलवार की शाम विवेचक को दिल्ली भेजा। विवेचक ने अस्पताल से मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट हासिल की और डॉक्टरों की जांच के आधार पर केस में धारा 376 बढ़ा दी गई। पुलिस को 2 दिन पहले दिल्ली महिला आयोग के विजिट की भनक लग चुकी थी। इसलिए आनन-फानन में आरोपी को वारदात के 9 दिन बाद जेल भेजा गया।

मंगलवार को ही मेरठ बुलंदशहर के एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने एक वीडियो बयान जारी करके बताया कि अहमदगढ़ मामले में जो मुकदमा दर्ज किया गया था वह पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर था। विवेचक ने मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट अवलोकन करने के बाद केस में धारा 376 बढ़ा दी है और आरोपी को जेल भेज दिया गया है। एसएसपी बुलंदशहर का यह बयान दिल्ली महिला आयोग की चिट्ठी जारी होने के बाद आया है।

15 अक्टूबर को बुलंदशहर के अहमदगढ़ में वारदात हुई। 25 अक्टूबर को दिल्ली महिला आयोग की टीम पीड़ित परिवार से मिली और डॉक्टरों से बच्ची के साथ हुई घटना की जानकारी ली। महिला आयोग के विजिट की जानकारी के बाद बुलंदशहर पुलिस में आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजा लेकिन पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पढ़ना भूल गई। 26 अक्टूबर को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर पुलिस की शिकायत की। चिट्ठी जारी होने के बाद आला अधिकारियों को कार्रवाई के लिए आदेशित किया गया। 26 अक्टूबर की देर शाम को एसएसपी बुलंदशहर के आदेश के बाद केस के विवेचक दिल्ली पहुंचे और उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन किया। मेडिकल जांच रिपोर्ट के आधार पर रातों-रात केस में धारा 376 बढ़ाई गई। केस के विवेचक को पीड़िता का हाल-चाल लेने में 9 दिन का वक्त लगा। 9 दिन तक विवेचक यही नहीं समझ पाए कि उन्हें केस की जांच में मेडिकल रिपोर्ट की की आवश्यकता है या नहीं।

स्टोरी- नरेंद्र प्रताप

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