
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के ”यौन इच्छाओं पर नियंत्रण’ वाले फैसले पर आपत्ति जताया। एससी ने कहा कि इस फैसले में कुछ पैराग्राफ समस्या पैदा करने वाले हैं। इस तरह के फैसले देना बिल्कुल गलत है।
दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। जिसपर सर्वोच्च न्यायालय ने आठ दिसंबर को हाई कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कुछ टिप्पणियों को बेहद आपत्तिजनक और पूरी तरह अनुचित करार दिया था।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें किशोरावस्था में लड़कियों को ‘अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण’ रखने की चेतावनी दी गई थी। ताकि उन्हें समाज की नजरों में ‘हारी हुई’ न समझा जाए। “जब वह यौन सुख का दो मिनट का आनंद लेने के लिए हार मान लेती है।” गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की।
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह टिप्पणी न केवल ‘समस्याग्रस्त’ पाया गया है, बल्कि फैसले में लागू कानूनी सिद्धांतों पर भी सवाल उठा रहे हैं।
ये है पूरा मामला
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने युवा वयस्कों से जुड़े यौन उत्पीड़न के एक मामले में अपील पर फैसला करते समय किशोरों के लिए सलाह का एक सेट जारी किया था। जिसमें लड़कियों को ‘अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण’ रखने की चेतावनी दी गई थी। जिसके बाद आक्रोश फैल गया। सुप्रीम कोर्ट को मामले में स्वत: संज्ञान लेना पड़ा। सर्वोच्च न्यायालय ने तल्ख़ टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे निर्णय देना बिलकुल गलत









