Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि का पहला दिन, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि सब जानिए

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र आज दिन में 11:25 ए एम तक रहेगा, इसके बाद हस्त नक्षत्र होगा। इसी दिन, विशेष मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है।

आज 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है। यह महापर्व 1 अक्टूबर तक चलेगा, और फिर 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ इसका समापन होगा। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है, जो उन्नति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ मां शैलपुत्री की विशेष पूजा की जाती है।

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय के अनुसार, शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होती है, जो आज सोमवार को प्रात:काल से लेकर रात 01:19 एएम तक है। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र आज दिन में 11:25 ए एम तक रहेगा, इसके बाद हस्त नक्षत्र होगा। इसी दिन, विशेष मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है।

कलश स्थापना का शुभ समय
कलश स्थापना के लिए मुहूर्त सुबह 06:00 बजे से लेकर शाम तक रहेगा, लेकिन विशेष अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:36 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक है। इस दौरान कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है।

मां शैलपुत्री की पूजा विधि

मां शैलपुत्री को सफेद रंग बहुत प्रिय है, इसलिए इस दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां शैलपुत्री को रोली, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें। विशेष रूप से, लाल गुड़हल का फूल या सफेद फूल पूजा में शामिल करें।

मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
मां शैलपुत्री की पूजा से भक्तों को स्थिरता और शक्ति मिलती है। यह दिन हमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने का अवसर देता है। नवरात्रि के ये नौ दिन आत्म-चिंतन, शुद्धिकरण और भक्ति के प्रतीक होते हैं। इस दौरान अधिक से अधिक देवी की पूजा करें और अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भरें।

पूजा मंत्र

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते।।
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

इस शुभ अवसर पर सभी भक्तों को मां दुर्गा की कृपा प्राप्त हो और उनके जीवन में समृद्धि और खुशहाली आए।

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