
Siddharthnagar: जिले में धान खरीद के दौरान हुए करोड़ों के घोटाले में नया मोड़ आ गया है। पीसीएफ (पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) के पूर्व जिला प्रबंधक अमित कुमार चौधरी और भुगतान अधिकारी उमानंद उपाध्याय पर 11 करोड़ के गबन का मामला दर्ज था, लेकिन अब इन दोनों ने साक्ष्य को मिटाने के लिए पीसीएफ कार्यालय से चेक वितरण रजिस्टर चोरी कर लिया।
67 करोड़ रुपये का गलत तरीके से भुगतान
जब इस रजिस्टर के चोरी होने की जांच शुरू हुई, तो एक और बड़ा घोटाला सामने आ गया। जांच में पता चला कि पीसीएफ के इन दोनों अधिकारियों ने गेहूं और धान परचेज खातों से 67 करोड़ रुपये का गलत तरीके से भुगतान किया था। यह भुगतान लगभग 200 लोगों और फर्मों को किया गया था, जिसमें आदर्श उपभोक्ता समितियां, क्रय-विक्रय समितियां, राइस मिलर्स और अन्य फर्म शामिल थीं।
बैंक स्टेटमेंट निकलवाकर मामले की जांच शुरू
इस घोटाले के बाद जिले के प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वर्तमान जिला प्रबंधक विजय प्रताप पाल ने रजिस्टर चोरी होने के बाद बैंक स्टेटमेंट निकलवाकर मामले की गहन जांच शुरू की। उन्होंने इस रिपोर्ट को डीएम को भेजा, जिसके बाद DM डॉ. राजा गणपति ने मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से कराने के लिए शासन को पत्र लिखा है।
घोटाले का पूरा मामला
सिद्धार्थनगर जिले में 2023-24 के वित्तीय वर्ष में धान की खरीद के दौरान पीसीएफ के 35 केंद्रों पर घोटाले की पुष्टि हुई थी। इन केंद्रों पर 16.55 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया था। इसके बाद जांच में छह केंद्र प्रभारियों पर तीन करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप भी लगाया गया। इन केंद्रों पर पैसे जमा न करने पर केस भी दर्ज हुए हैं।
अब तक आठ लोगों पर केस
अब तक इस मामले में आठ लोगों पर केस दर्ज हो चुका है। इनमें पीसीएफ के पूर्व जिला प्रबंधक और भुगतान अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, छह क्रय केंद्र प्रभारियों पर भी तीन करोड़ से अधिक के गबन के आरोप में केस दर्ज किया गया है।









