
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए समाजवादी पार्टी ने अपने संगठनात्मक और सामाजिक समीकरण साधने की कवायद तेज़ कर दी है। इसी कड़ी में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में पार्टी के तमाम ब्राह्मण नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में ब्राह्मण समाज से आने वाले विधायक, पूर्व विधायक, सांसद और पूर्व सांसद शामिल हुए, जिनके साथ अखिलेश यादव आगामी चुनाव में ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी के पक्ष में लाने की रणनीति पर विस्तृत मंथन करेंगे।
यह बैठक इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि प्रदेश की राजनीति में बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी से ब्राह्मण वोटरों की कथित नाराज़गी की खबरें सुर्खियों में रही हैं। इसके बाद से ही सपा और बसपा लगातार इस वोट बैंक को अपने पक्ष में लाने के प्रयास में जुटी हैं। पार्टी के दिग्गज नेता रहे जनेश्वर मिश्र की जयंती को भी भव्य रूप से मनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि ब्राह्मण समाज में एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया जा सके। बैठक में इस आयोजन की रूपरेखा भी तय की जाएगी।
आँकड़ों पर नज़र डालें तो उत्तर प्रदेश में 10 से 15 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाता हैं, जो प्रदेश की करीब 115 विधानसभा सीटों पर अपना सीधा प्रभाव रखते हैं। वहीं, 12 जिले ऐसे हैं जहाँ ब्राह्मण वोटर किसी भी प्रत्याशी की जीत-हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि सपा हर हाल में ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़कर रखना चाहती है। गौरतलब है कि अखिलेश यादव अपने ‘पीडीए’ फॉर्मूले के ‘ए’ यानी अगड़ा वर्ग को लगातार परिभाषित कर रहे हैं और हाल ही में शंकराचार्य विवाद के दौरान भी उन्होंने खुलकर धर्माचार्यों का समर्थन किया था।









