पथराव, आगजनी और बवाल, लेह-लद्दाख में भड़की हिंसा, सोनम वांगचुक के समर्थन में सड़क पर उतरे GenZ

सोनम वांगचुक ने पिछले कई महीनों से लद्दाख के लिए यह मांग उठाई है। इसके लिए उन्होंने लंबा मार्च और भूख हड़ताल तक की। वे चाहते हैं कि....

लेह: बुधवार, 24 सितंबर को लेह में छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का उद्देश्य सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में उनका समर्थन जताना था, जो लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और उसे छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, और प्रदर्शनकारी CRPF की एक गाड़ी को आग लगा देने तक पहुंच गए।

सोनम वांगचुक ने पिछले कई महीनों से लद्दाख के लिए यह मांग उठाई है। इसके लिए उन्होंने लंबा मार्च और भूख हड़ताल तक की। वे चाहते हैं कि लद्दाख को अन्य राज्यों के समान पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और उसे छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि क्षेत्र की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे। वांगचुक की अगुवाई वाली लद्दाख की एपेक्स बॉडी भी इसी मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठा रही है।

छात्रों का यह प्रदर्शन वांगचुक के समर्थन में किए गए आंदोलन का हिस्सा माना जा रहा है। विरोध इतना उग्र था कि पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने में काफ़ी मेहनत करनी पड़ी। हालांकि, प्रयास के बावजूद प्रदर्शन और भड़क गया, जिससे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। इसके तहत जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बन गया, जबकि लद्दाख को लेह और कारगिल मिलाकर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। तब से ही लद्दाख के लोग इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, ताकि क्षेत्र के विकास और प्रशासनिक अधिकार सुनिश्चित किए जा सकें।

लेह में बुधवार के विरोध प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि युवा पीढ़ी भी इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज़ उठाने के लिए तैयार है। सोशल एक्टिविस्ट वांगचुक की मांग और उनके समर्थन में छात्रों की भागीदारी लद्दाख को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा रही है।

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