
इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि को लेकर छात्रों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले छात्रों ने जहां फीस वृद्धि के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया था तो वहीं अब छात्र संघ भवन के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए हैं.
अनशनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन गरीब और कमजोर तबके के साथ नाइंसाफी कर रहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए गांव, गरीब और किसान के बच्चे आते हैं, जिनके पास पढ़ाई के लिए बेहद सीमित संसाधन होते हैं.
आर्थिक रूप से कमजोर तबका यहां शिक्षा हासिल करता है. प्रदर्शनरत छात्रों का कहना है कि गांव के किसान और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए शिक्षा का एक बड़ा केंद्र इलाहाबाद विश्विद्यालय रहा है लेकिन मौजूदा कुलपति इलाहाबाद विश्वविद्यालय का निजीकरण करना चाहती है.
छात्रों ने विश्वविद्यालय कुलपति पर आरोप लगाया कि वो विश्विद्यालय का निजीकरण कर देना चाहती हैं, जिससे यहां गांव, गरीब और किसान के बच्चे पढ़ाई ना कर सके. इसी वजह से यहां पर फीस को चार गुना बढ़ा दिया गया है. छात्रों का कहना है कि इलाहाबाद विश्विद्यालय प्रशासन को फीस वृद्धि के इस फैसले को वापस लेना पड़ेगा वरना अभी तो छात्र आमरण अनशन पर बैठे है, आने वाले समय में अगर जरूरत पड़ी तो छात्र एक बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी इलाहाबाद विश्विद्यालय प्रशासन की होगी.
दरअसल, इलाहाबाद विश्विद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में 31 अगस्त को सभी कोर्स की फीस चार गुना बढ़ा दी गई. बढ़ी हुई फीस सत्र 2022-23 में लागू भी हो जाएगी. वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि लंबे समय से फीस में कोई बढ़ोतरी नही की गई थी, ऐसे में विश्विद्यालय को बचाने के लिए फीस बढ़ाई गई है. वहीं छात्रों के बढ़ते विरोध को लेकर विश्विद्यालय परिसर में पुलिस भी तैनात कर दी गई है. हालांकि आमरण अनशन पर बैठे छात्र मांगे पूरी होने से पहले उठने को तैयार नहीं हैं.









