
नई दिल्ली: देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव में अनुसूचित जाति (SC) तथा अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के अनिवार्य रोटेशन को लेकर दायर की गई याचिका पर देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन सीटों को बदलने और उनके रोटेशन की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह पूरा विषय संसद और विधायिका के विधायी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए अदालतें इस मामले में कोई निर्देश जारी नहीं कर सकती हैं।
चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि देश की कई आरक्षित सीटें पिछले सात दशकों से लगातार एक ही वर्ग के लिए आरक्षित चली आ रही हैं, जिस पर बदलाव की जरूरत है। हालांकि, अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पहले दिए गए फैसले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी जोड़ा कि इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर संसद या संबंधित विधायिका को ही विचार करना चाहिए और सभी पक्षों को इस रोटेशन के सिद्धांत पर आपसी सहमति बनाने का प्रयास करना चाहिए। शीर्ष अदालत के इस रुख के बाद याचिकाकर्ताओं को फिलहाल कानूनी मोर्चे पर झटका लगा है।









