जड़ से छेड़खानी जोशीमठ के लिए बन गया बहुत बड़ा खतरा, हजारों मकानों में आ चुकी दरारें, केंद्र से लेकर राज्य सरकार अलर्ट

मिश्रा आयोग की रिपोर्ट ने 1976 में ही इसकी आशंका जता दी थी। जोशीमठ की जड़ पर छेड़खानी जोशीमठ के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गया है। मिश्रा आयोग द्वारा जोशीमठ का 1976 में सर्वेक्षण किया गया था।

जोशीमठ में जमीन धंसने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। सिंहधार वॉर्ड में भगवती मंदिर धराशायी हों चुका है। जमीन धंसनें कें बाद तबाही की पहली घटना है। जोशीमठ में करीब 603 घरों में दरारे आ चुकी हैं। प्रभावितों कों सुरक्षित विस्थापित करना सरकार कें सामने एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

मिश्रा आयोग की रिपोर्ट ने 1976 में ही इसकी आशंका जता दी थी। जोशीमठ की जड़ पर छेड़खानी जोशीमठ के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गया है। मिश्रा आयोग द्वारा जोशीमठ का 1976 में सर्वेक्षण किया गया था। आयोग नें जोशीमठ को एक मोरेन में बसाया हुआ था। रिपोर्ट में जोशीमठ के नीचे की जड़ से जुड़ी चट्टानों, पत्थरों कें साथ छेड़छाड़ नहीं करने की हिदायत दी थीं। जोशीमठ में एनटीपीसी प्रोजेक्ट के साथ इस प्रोजेक्ट के अलावा जोशीमठ में हेलंग मारवाड़ी बाईपास का भी विरोध हो रहा है। जोशीमठ में हो रहे भू धंसाव और घरों में आ रही दरारों को लेकर केंद्र से लेकर राज्य सरकार अलर्ट हो चुकी है।

अब आईआईटी रुड़की के भू विज्ञान के दो वैज्ञानिकों ने भू धंसाव पर बड़े कारण बताए है। वही दोनों भू वैज्ञानिकों ने कहा कि पहाड़ों में भू धंसाव एक नेचुरल कारण है। लेकिन जोशीमठ की भौगोलिक परिस्थिति थोड़ा सा अलग है क्योंकि औली,धौली गंगा से लेकर भूकम्प का भी बड़ा कारण है। इसलिए यहां स्पेशल लैंडस्केप हो गया है। उन्होंने कहा कि जोशीमठ में आबादी बढ़ने के साथ ही शहर में ड्रैनेज सिस्टम उस हिसाब से नही बन पाया है। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों का कहना है जोशीमठ में हो रहे भू धंसाव को रोका जा सकता है। इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाने पड़ेंगे। साथ ही कई जगहों का जियोफीजकल सर्वे और स्टडी करना होगा तभी कुछ सॉल्यूशन निकल सकता है। वही वैज्ञानिकों का कहना है कि सभी एक साथ स्टडी करे तो जोशीमठ में हो रहे भूधँसाव पर सॉल्यूशन निकल सकता है।

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